डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।मप्र सरकार ने कोविड की पहली एवं दूसरी लहर में इसके मरीजों के इलाज में कुल 1163 करोड़ 38 लाख रुपये व्यय किये हैं।राज्य के स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त अधिकृत जानकारी के अनुसार, पहली लहर में मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक शासकीय कोविड उपचार केंद्रों एवं कोविड केयर सेंटरों में मरीजों के इलाज में कुल 673 करोड़ 40 लाख रुपये एवं दूसरी लहर मार्च 2021 से जून 2021 तक 230 करोड़ 5 लाख रुपये व्यय किये गये। इस प्रकार दोनों लहरों में कुल 903 करोड़ 45 लाख रुपये व्यय हुये। इसी प्रकार, अनुबंधित निजी अस्पतालों में दोनों लहरों में कुल 259 करोड़ 93 लाख 51 हजार 65 रुपये व्यय किये गये। इस प्रकार दोनों लहरों में सरकारी एवं निजी दोनों अस्पतालों में कुल 1163 करोड़ 38 लाख रुपये व्यय किये गये।
इसी प्रकार, दोनों लहरों में शासकीय अस्पतालों में कुल 95 हजार 704 तथा निजी अस्पतालों में कुल 39 हजार 801 कोविड मरीजों का इलाज किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कोविड की दोनो लहरों के दौरान जो व्यक्ति नान कोविड से मरे उन्हें भारत सरकार के सीडीसी-सेन्ट्रल डिसीज कण्ट्रोल एण्ड प्रिवेन्शन की तीस श्रेणियों में रखा गया यथा कार्डियोसक्यूलर डिसीज, कैंसर, रेस्पिरेटरी डिसीज, डिजेस्टिव डिसीज, किडनी डिसीज, लोवर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, लीवर डिसीज, डायबिटिीज मेलिटस, पार्किंसन डिसीज, सुसाईड, अल्कोहल डिसआर्डर, रोड इंसीडेंट, डायरिया डिसीज, ड्रक डिसआर्डर, नियोनेटल डेथ, फायर/बर्न, होमीसाईड, ड्रॉनिंग, एचआईवी/एड्स, ट्यूबरोक्लोसिस, न्यूट्रिशनल डेफिशियेन्सी, हार्ट रिलेटेड हॉट एण्ड कोल्ड एक्सपोजर, प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन, मेनीनजायटिस, हेपेटाईटिस, मेटरनल डेथ, टेरेरिज्म, मलेरिया, नेचुरल डिसास्टर एवं कॉन्फिक्ट।

86 साल बाद बेशकीमती भूमि हनुमानजी के नाम अंकित हुई

86 साल बाद एक बेशकीमती भूमि को हनुमानजी के नाम दर्ज करने के आदेश राजस्व मंडल ने जारी किये हैं। 11 हजार 500 वर्गफीट की यह भूमि ग्वालियर शहर के वार्ड 38 में स्थित है। इसे निजी भूमि बताकर हथियाने की कोशिश की जा रही थी। राजस्व मंडल के सदस्य मनु श्रीवास्तव ने लंबी सुनवाई के बाद इसे सरकारी घोषित कर अभिलेखों में माफी देवस्थान दर्ज करने के आदेश जारी किये हैं। इस भूमि पर हनुमानजी का मंदिर बना हुआ है तथा अब सरकार इस देवस्थान का रखरखाव करेगी।
दरअसल वर्ष 1935 में यह भूमि सिर्फ माफी के रुप में दर्ज थी और निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज थी। इसके अनेक वारिसदार भी बन गये थे। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था परन्तु वहां से जिला कलेक्टर को जांच के आदेश दिये गये थे, परन्तु कलेक्टर ने कोई आदेश जारी नहीं किये। मामले में अपर आयुक्त राजस्व के समक्ष अपील हुई परन्तु वहां भी यह अस्वीकार हो गया। इसके बाद वर्ष 2015 में यह मामला राजस्व मंडल में पहुंचा जिस पर अब यह आदेश जारी किया गया है।

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