डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।राज्य के सहकारिता आयुक्त नरेश पाल ने अपने सभी संयुक्त पंजीयकों एवं उप व सहायक पंजीयकों को मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के तहत विभागीय न्यायालयीन प्रकरीण सुसंगत नियमों के तहत न निपटाने पर हिदायत जारी की है।
आयुक्त ने कहा है कि एक माह में कितने विभागीय न्यायालयीन प्रकरण निपटाये जायें, इसके लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने भी कहा है कि प्रशासनिक/अर्ध न्यायिक मामलों में स्पीकिंग आर्डर जारी किये जायें। लेकिन संज्ञान में आया है कि न्यायालयीन प्रकरणों की सुनवाई करते समय तथा आदेश पारित समय कतिपय पीठासीन अधिकारियों द्वारा सुसंगत नियमों काा ध्यान नहीं रखा जाता है, निर्धारित न्यायालयीन प्रक्रिया का पालन न किये जाने के फलस्वरुप ऐसे पारित त्रुटिपूर्ण आदेश के विरुध्द पक्षकारों को वरिष्ठ न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने तथा प्रकरण में उनके पक्ष में आदेश पारित होने की संभावना बनी रहती है। परिणामस्वरुप वास्तविक पक्षकार न्याय से वंचित हो जाता है। इसलिये यह सुनिश्चित करें कि माह में पारित कितने आदेशों के विरुध्द अपील में स्थगन प्राप्त हुये और कितने निर्णयों को अपास्त किया गया है।
आयुक्त ने अपनी हिदायत में यह भी कहा है कि प्रत्येक न्यायालयीन निर्णय को आवश्यक रुप से अपलोड करने के भी निर्देश दिये गये थे, परन्तु कतिपय अधिकारियों द्वारा निर्णय विभागीय पोर्टल पर अपलोड नहीं कराये जा रहे हैं। आयुक्त ने इन हिदायतों का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की चेतावनी भी दी है।

गुम एवं अपहृत बालिकाओं की जानकारी अब नये फार्मेट में होगी

प्रदेश में अब गुम एवं अपहृत बालिकाओं की जानकारी नये फार्मेट में ली जायेगी। यह नया फार्मेट दरअसल अधिकार पत्र है जो ऐसे प्रकरणों में सूचनाकत्र्ता को दिया जाता है। नये फार्मेट में अब सूचनाकत्र्ता के दायित्व भी होंगे।
पुलिस मुख्यालय में महिला अपराध शाखा की एडीजीपी प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी कर कहा है कि नये फार्मेट वाले अधिकार पत्र को सूचनाकत्र्ता को प्रदान करें। इस नये फार्मेट में चार शीर्षकों में 26 बिन्दुओं पर जानकारी भरकर सूचनाकत्र्ता को देनी होगी। पहले शीर्षक पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्यवाही के 11 बिन्दु रखे गये हैं जिनमें शामिल हैं : गुमने की सूचना पुलिस को देने पर तत्काल प्रकरण पंजीबध्द कराने का अधिकार, एफआईआर की प्रति नि:शुल्क प्राप्त करने का अधिकार, प्रकरण के विवेचक का नाम एवं मोबाईल नंबर प्राप्त करने का अधिकार, समय-समय पर पुलिस से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार, संदेही का नाम बताने पर पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही की अद्यतन स्थिति गुमशुदा के निकटतम संबंधियों यथा माता/पिता/भाई/बहन को जानने का अधिकार, थाना प्रभारी द्वारा अपहृता एवं संदेही को तलाश करने के लिये किस पुलिस टीम को रवाना किया गया है-के नाम एवं मोबाईल नंबर जानने का अधिकार, गुमशुदा की फोटो प्रसारित की गई अथवा नहीं जानने का अधिकार, अपहर्ता की तलाश के हर प्रयास को जानने का अधिकार जिससे अपहर्ता को सुरक्षित बरामद किया जा सके, अपहर्ता को महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष कथन देने का अधिकार, नि:शुल्क विधिक सहायता लेने का अधिकार तथा महत्वपूर्ण सम्पर्क नंबर (कलेक्टर एवं एसपी के मोबाईल नंबर सहित) प्राप्त करने का अधिकार।
इसी प्रकार, पुलिस कार्यवाही की समय सारिणी शीर्षक के अंतर्गत सात बिन्दु दिये गये हैं जिनमें शामिल हैं : अपराध कायम होने के तत्काल बाद एफआईआर की नि:शुल्क प्रति प्रदान करना, अपहर्ता की आसपास के संभावित इलाकों में तलाश करना और सभी अन्य थानों को व पुलिस कण्ट्रोल रुम और जिले की अन्य इकाईयों को सूचित करना, 24 घण्टों के अंदर अन्य संबंधित जिलों को सूचित करना एवं घटना से संबंधित गवाहों से पूछताछ करना, सटीक जानकारी मिलने पर अपहर्ता को तलाशने टीम रवाना करना एवं आरोपी की गिरफ्तारी करना। महत्वपूर्ण मोबाईल नंबर शीर्षक के अंतर्गत पांच बिन्दु दिये गये हैं जिनमें शामिल हैं : विवेचक, थाना प्रभारी, एसडीओपी/सीएसपी, एएसपी एवं एसपी। आपके (शिकायतकत्र्ता के) दायित्व शीर्षक में तीन बिन्दु दिये गये हैं जो हैं : अपहर्ता के सभी मोबाईल नंबर, ई-मेल आईडी, मित्रों के नाम एवं अन्य संबंधित जानकारी पुलिस को उपलब्ध करावें एवं यदि अपहर्ता के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त होती है तो उसे तत्काल पुलिस को सूचित करें और अपहर्ता यदि स्वयं आ जाती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें व कथन हेतु प्रस्तुत करें।

 

प्रदेश में निजी संस्था करेगी 69 लाख रुपये में रेत एवं अन्य गौण खनिजों की खदानों का सर्वे

भोपाल।प्रदेश के सभी 52 जिलों में एक निजी संस्था 68 लाख 84 हजार रुपये में रेत एवं अन्य गौण खनिजों की खदानों का सर्वेक्षण करेगी तथा जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट बनाकर देगी। एनजीटी के आदेश पर राज्य के खनिज विभाग ने इस निजी संस्था का चयन किया है।
तीन निजी संस्थाओं इन सिटू एनवायरो केयर भोपाल, एफईसीसीएम भोपाल तथा एसिरिज एनवायरोटेक इंडिया लिमिटेड यूपी ने इस सर्वेक्षण के लिये एक्सप्रेस आफ इन्टरेस्ट भरा था। खनिज विभाग प्राप्त वितीय प्रस्तावों के आधार पर इनमें से इन सिटू एनवायरो केयर भोपाल संस्था का चयन कर लिया है। अब इस संस्था को 68 लाख 84 हजार रुपये देने की प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है तथा अब यह संस्था जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करेगी। यह संस्था भारत सरकार के नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार एजुकेशन एण्ड ट्रेनिंग यानि नॉबेट से मान्यता प्राप्त भी है।

डॉ. नवीन जोशी

 

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