माता-पिता के कहने पर संन्यास का विचार त्यागा, पूर्व पति से प्रताड़ित हो रही महिला से शादी का फैसला किया तो परिजन खलनायक बन गए
कीर्ति राणा /इंदौर

ये कहानी पूरी तरह फिल्मी है।मुंबई के चित्रकार-धार्मिक विचारों वाले पुजारी ने संन्यास लेने का फैसला कर लिया था। अभा अखाड़ा परिषद के सचिव महंत हरि गिरी इसी अखाड़े में संन्यास दीक्षा की तैयारी भी कर रहे थे।मयूर के माता-पिता को पता चला तो उसे भावनात्मक दबाव बना कर संन्यास लेने से रोक दिया।और जब मयूर आप्टे ने पूर्व पति से परेशान इंदौर निवासी एक महिला की पीड़ा से द्रवित होकर उसके साथ शादी करने का निर्णय लिया तो माता-पिता ही खलनायक बन गए।

महिला के तलाक प्रकरण का निराकरण न होने की वजह से दोनों न्यायालयीन औपचारिकता पूरी कर लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं लेकिन पूर्व पति के साथ ही मयूर के माता-पिता ने भी सदर बाजार थाने में प्रकरण दर्ज करा दिया है।महिला के परिजनों को इस रिश्ते पर आपत्ति नहीं है लेकिन पूर्व पति के परिजनों, मयूर के माता-पिता की धमकियों और सदर बाजार थाना के दबाव से ये दोनों शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना से जूझ रहे हैं।
बीते साल कोरोना के चलते मुंबई में कामकाज ठप हो जाने की वदह से ज्योतिष-पुजारी-चित्रकारी करने वाले मयूर अपने माता-पिता दिनेश आप्टे और मां वैशाली के साथ नासिक में आकर रहने लगे थे।वहीं पड़ोस में रहने वाली महिला उनसे ज्योतिष परामर्श लेने आई। बातों बातों में उसने अपनी शादी के बाद से पारिवारिक कलह आदि की जानकारी के साथ बताया कि वह इंदौर छोड़कर नासिक में रह रही है और पति को यहां एक बेकरी में नौकरी भी लगवा दी लेकिन अपनी आदतों में सुधार नहीं करने के चलते रोज विवाद हो रहे हैं।इस बीच पुत्र का जन्म हुआ लेकिन वह मंदबुद्धि का होने से ससुरालवालों ने उस पर पति को छोड़ने का दबाव बनाने के साथ ही प्रताड़ित करना शुरु कर दिया।नासिक में जिस मौसी का लड़का साथ रहता था वह भी गलत हरकतें करने लगा।
इस सारी व्यथा-कथा से द्रवित मयूर ने महिला के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। इस पर नासिक कोर्ट में महिला ने पूर्व पति से तलाक के लिए अभिभाषक कविता पाटिल के माध्यम से आवेदन लगा दिया। यह केस कोर्ट में चल रहा है।वकील की सलाह पर इन दोनों ने इंदौर न्यायालय में लिव इन रिलेशन में रहने संबंधी विधिवत जानकारी देकर कोर्ट से इस आशय का सर्टिफिकेट भी प्राप्त कर लिया था।
इस सारी प्रक्रिया के बाद से मयूर आप्टे रामबाग में महिला के परिजनों के साथ ही रहने लगा। चूंकि वह मंदिरों और मूर्तियों के रिसोरेशन के साथ ही चित्रकारी में भी सिद्धहस्त है तो शहर के प्रमुख मंदिरों में काम का अवसर भी मिल गया।
इसी बीच नासिक निवासी माता-पिता उसपर महिला का साथ छोड़ने का दबाव बनाते रहे और उसके खिलाफ महिला के पूर्व पति ने सदर बाजार थाने में भी लिव इन रिलेशन में अवैध रूप से रहने की रिपोर्ट तो लिखवा ही दी। पूर्व पति के परिजनों के साथ ही मयूर के माता-पिता ने भी उसके साथ एकाधिक बार मारपीट की। फोन पर धमकियां तो निरंतर मिल ही रही हैं।
माता-पिता के साथ रहना चाहता हूं और उसे भी नहीं छोड़ सकता
पिछले छह-आठ महीनों से चल रहे पुलिस प्रकरण में आए दिन नासिक-इंदौर आना-जाना पड़ रहा है।15 वर्ष की उम्र से मंदिर में पूजापाठ से जुड़े 27 वर्षीय मयूर आप्टे का कहना है उन लोगों से जान का खतरा तो है ही। मैं थाने में भी कह चुका हूं कि अपने माता-पिता के साथ रहना चाहता हूं और उस महिला से संबंध बना चुका हूं, उसे मंझधार में नहीं छोड़ सकता। तलाक प्रकरण का निराकरण होने के बाद विधिवत शादी कर लूंगा।अब सदर बाजार थाने का रुख भी बदल गया है।
शहर के मंदिरों-मूर्तियों को श्रृंगारित किया
इंदौर में रह रहे मयूर राजवाड़ा क्षेत्र में स्थित महालक्ष्मी मंदिर में मूर्ति का रंगरोगन, रामबाग इलाके में स्थित वैदिकाश्रम के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद भागवत कथा सप्ताह आयोजन में सात दिन तक कथा के प्रसंगानुरूप लक्ष्यवेधी श्रृंगार, वैशाली नगर वाले दत्त मंदिर में कलाकारी, नरहर गुरु वैदिक आश्रम के गणपति मंदिर का सौंदर्यीकरण, राजेंद्र नगर में राम मंदिर का श्रृंगार आदि कर चुके हैं।

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