जल संसाधन में 4 बरस पुराने मामले का पटाक्षेप

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।राज्य के जल संसाधन विभाग ने अपने प्रभारी मुख्य अभियंता का अनियमितता संबंधी प्रकरण इस आधार पर बिना दण्ड के समाप्त कर दिया क्योंकि यह मामला चार साल से अधिक पुराना हो गया था।प्रभारी मुख्य अभियंता एसडी श्रीवास्तव जब प्रतिनियुक्ति पर मप्र ग्रामीण विकास प्राधिकरण में महाप्रबंधक के पद पर पदस्थ थे तब पीआईयू अलीराजपुर में पदस्थी के दौरान गलत मापों के आधार पर बखतगढ़ साकड़ी से बोरवाला सडक़ मार्ग निर्माण का भुगतान कर दिया था। इस पर उन्हें प्राधिकरण के सीईओ ने 19 नवम्बर 2013 को शो कॉज नोटिस जारी किया था। परन्तु इस नोटिस का एसडी श्रीवास्तव ने कोई जवाब नहीं दिया। यह मामला लम्बे समय तक बिना कार्यवाही के दबा रहा।
सात साल बाद यह मामला संज्ञान में आने पर विभाग ने 21 जनवरी 2021 को पुन: एसडी श्रीवास्तव को शो कॉज नोटिस जारी किया, लेकिन जवाब देने के पूर्व वे 31 जनवरी 2021 को रिटायर हो गये। चूंकि अनियमितता संबंधी मामले को चार वर्ष से अधिक समय हो गया था इसलिये अब जल संसाधन विभाग ने बिना किसी दण्ड के यह मामला समाप्त कर दिया है।
भू जलविद दण्डित :
इधर भूजल सर्वेक्षण इकाई मुरैना में पदस्थ सहायक भू जलविद डीके शौरी को वर्ष 2012 से वर्ष 2018 तक के भू जल नमूनों के एकत्रीकरण कार्य में रुचि न लेने पर आरोप पत्र जारी किया गया तथा जांच में आरोप प्रमाणित पाये गये। इस पर अब उन्हें दो वार्षिक वेतनवृध्दि के समतुल्य राशि वसूल करने के दण्ड से दण्डित किया गया है।

अब उच्च न्यायिक सेवा के जजों को भी पांच लाख रुपये का बाण्ड भरना होगा

भोपाल।राज्य सरकार ने उच्च न्यायिक सेवा के जजों के लिये भी सिविल जजों की तरह 5 लाख रुपये का बाण्ड जमा करने की अनिवार्यता कर दी है। इस सेवा में आने वाले जजों को तीन माह के बराबर अपनी सेलरी एवं भत्ते देने या 5 लाख रुपये का बाण्ड भरना होगा ताकि वे तीन साल तक निरन्तर कार्य करते रहें और इस बीच नौकरी न छोड़ें।
उच्च न्यायिक सेवा के जजों के लिये भी यह छूट दी गई है कि यदि वे तीन साल के अंदर किसी केंद्रीय या राज्य सेवा की अन्य नौकरी को पूर्वानुमति लेकर ज्वाईन करते हैं, तब उन्हें ऐसे बाण्ड की राशि जमा करने की जरुरत नहीं होगी।

लोनिवि ने अपने 31 रेस्ट हाऊस पर्यटन विभाग को सौंपने पर लगाया अड़ंगा

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।राज्य के लोक निर्माण विभाग ने अपने 31 रेस्ट हाऊसों को पर्यटन विभाग को सौंपने पर अड़ंगा लगा दिया है। उसने पर्यटन विभाग से कहा है कि वह पहले यह बताये कि इन रेस्ट हाऊसों के आसपास शासकीय सेवकों के ठहरने की अन्य कौनसी व्यवस्था मौजूद है।
लोनिवि ने मुरैना जिले के सबलगढ़ में मनोहारी स्थल पर स्थित अपने रेस्ट हाऊस को पर्यटन विभाग को देने से इंकार कर दिया है क्योंकि इसके आसपास शासकीय सेवकों के ठहरने की अन्य कोई व्यवस्था नहीं है। छिन्दवाड़ा जिले के तामिया में स्थित रेस्ट हाऊस को भी इसीलिये पर्यटन विभाग को नहीं दिया गया है।
दरअसल लोनिवि का तर्क है कि उसके रेस्ट हाऊसों को पर्यटन विभाग को देने पर उसमें शासकीय सेवक तो ठहर सकते हैं, परन्तु दौरे के समय उनमें ठहरने पर वहां मुलाकात के लिये आमजन एवं अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी आयेंगे जिससे अन्य पर्यटकों को परेशानी हो सकती है।
ये रेस्ट हाऊस मांगे हैं पर्यटन विभाग ने :
बैतूल में चापना, गुना में बम्होरी, खटकिया एवं मकसूदनगढ़, होशंगाबाद में ढेफना, रायसेन में बरेली, उदयपुरा और ओबेदुल्लागंज, अशोकनगर में चंदेरी, भिण्ड में मालनपुर, मुरैना में सबलगढ़, शिवपुरी में सुभाषपुरा, राजगढ़ में वहां का रेस्ट हाऊस, बुरहानपुर में असीरगढ़, बड़वानी में सेंधवा, झाबुआ में मेघनगर एवं थांदला, खरगौन में बरवाह दाम्मोद रोड एवं पिपलिया, अनूपपुर में राजेन्द्र ग्राम एवं अमरकंटक, सतना में रामपुर बघेलान एवं चित्रकूट, सीधी में मझौली, उमरिया में ताला, दमोह में बंधकपुर एवं खर्राघाट तथा छतरपुर में भीमकुण्ड।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि लोनिवि के करीब 31 रेस्ट हाऊस पर्यटन विभाग मांग रहा है। हमने सबलगढ़ के रेस्ट हाऊस पर आपत्ति ली है। इन रेस्ट हाऊसों को पर्यटन विभाग को सौंपने पर इनके आसपास शासकीय सेवकों के ठहरने की अन्य क्या व्यवस्था होगी, इसकी जानकारी मांगी गई है। उसके बाद ही इस पर सहमति देने के संबंध में निर्णय लिया जायेगा।

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