लखनऊ: आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव (UP Assembly Election 2022) से पहले समाजवादी पार्टी एक-एक कर सभी छोटे दलों को अपने साथ मिला रही. राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ सपा का गठबंधन तय है. जिसकी अब आधिकारिक घोषणा होना बाकि है. वहीं आज (बुधवार) को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने आज आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) से भी मुलाकात की. दोनों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत हुई.

सांसद और आप के उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह समाजवादी पार्टी के लोहिया ट्रस्ट कार्यालय पहुंचे. जहां उन्होंने अखिलेश यादव से मुलाकात की. करीब एक घंटे तक चली इस बाचीत के बाद संजय ने कहा कि आगामी चुनाव में गठबंधन को लेकर बातचीत हुई है. हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कुछ तय नहीं हुआ है. मुलाकात के बाद संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश को भाजपा से मुक्त कराने के लिए एक सामान्य मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा हुई. गठबंधन को लेकर बातचीत तय होगी तो जानकारी दी जाएगी. सीटों को लेकर अभी कोई बात नहीं हुई है.

आज हो सकता है RLD-सपा गठबंधन का ऐलान
इससे पहले मंगलवार को RLD के प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादवसे मुलाकात की थी. जयंत चौधरी ने मुलाकात के बाद तस्वीर साझा करते हुए लिखा था- ‘बढ़ते कदम’. जयंत के बाद अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया था- ”श्री जयंत चौधरी जी के साथ बदलाव की ओर.’ RLD सूत्रों के मुताबिक आज दोनों नेता गठबंधन का ऐलान कर सकते हैं. सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है. सूत्रों ने बताया कि जयंत चौधरी 50 सीटों की मांग कर रहे थे लेकिन अखिलेश से बातचीत के बाद RLD को 30-35 सीटें मिलने पर सहमति बनी है.

जयंत के रास्ते किसान आंदोलन का फायदा SP को
राजनीतिक जानकार ये तय मान रहे हैं कि किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को नुकसान हो सकता है. हालांकि इसका फायदा किसे मिलेगा इस पर अभी भी कई सवाल हैं. अखिलेश यादव और जयंत चौधरी ने बीजेपी के इस नुकसान का पूरा फायदा उठाने की तैयारी कर दी है. जयंत चौधरी की पार्टी का पश्चिमी यूपी के 13 जिलों में प्रभाव माना जाता है.

अगर ये गठबंधन वोट बटोरने में कामयाब रहा, तो बीजेपी की राहें वाकई मुश्किल हो सकती हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में सबसे बेहतर चुनाव लड़ रही है और कई छोटे दलों को अपने साथ मिला चुकी है. ऐसे में अगर आम आदमी पार्टी के साथ समाजवादी पार्टी गठबंधन के रूप में आगे बढ़ती है तो स्वाभाविक रूप से इसका फायदा समाजवादी पार्टी को और अधिक होगा.

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