14 साल पुराने नियम बदले सरकार ने

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश में अब पैरामेडिकल कालेज सौ बिस्तर होने पर ही खुल सकेगा। ये सौ बिस्तर किसी शासकीय या निजी चिकित्सालय से सम्बध्द भी हो सकेंगे। इसके लिये राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चौदह साल पुराने अपने नियमों को निरस्त कर नये नियम जारी किये हैं। नये नियमों के तहत अब नये पैरामेडिकल कालेज खुल सकेंगे तथा वर्तमान कालेज संचालित हो सकेंगे।
नये प्रावधानों के अनुसार, पैरामेडिकल कालेज हेतु स्वयं का भवन होना जरुरी होगा, यदि नहीं है तो पांच साल तक ही किराये का भवन मान्य होगा, इसके बाद नहीं। किराये के भवन में कालेज खोलने के लिये बीस लाख रुपये की एफडी पांच साल के लिये जमा कराना होगी और पांच साल बाद भी स्वयं का भवन नहीं बनाने पर यह एफडी राजसात कर ली जायेगी और संस्थान को ब्लेक लिस्ट में डाल दिया जायेगा जिससे वह आगे कभी भी कालेज खोलने के लिये आवेदन नहीं कर पायेगी।
इसी प्रकार, ये भी नये प्रावधान किये गये हैं कि मान्यता शुल्क में हर साल 8 प्रतिशत की दर से वृध्दि की जायेगी जबकि शिक्षण शुल्क में हर साल 7.4 प्रतिशत की दर से वृध्दि मान्य होगी। मप्र के मूल निवासी को प्रवेश हेतु प्राथमिकता देनी होगी। ये कालेज स्वीकृत 45 पाठ्यक्रम ही पढ़ा सकेंगे। पीजी कोर्स हेतु 76 हजार 220 रुपये, यूजी हेतु 41 हजार 570 रुपये, डिप्लोमा कोर्स हेतु 27 हजार 720 रुपये एवं प्रमाण-पत्र हेतु 21 हजार 940 रुपये आवेदन शुल्क रहेगा जबकि शिक्षण शुल्क पीजी कोर्स हेतु 1 लाख 33 हजार 60 रुपये, यूजी कोर्स हेतु 74 हजार 520 रुपये, डिप्लोमा कोर्स हेतु 47 हजार 910 रुपये एवं प्रमाण-पत्र हेतु 34 हजार 604 रुपये होगा।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में पैरामेडिकल कालेज मानक स्तर के हों, इसके लिये नये नियम जारी किये गये हैं। इनमें डाक्टर के स्थान पर डिप्लोमाधारी भी पढ़ा सकेगा। अगले एक पखवाड़े में नई मान्यता एवं नवीनीकरण के लिये ऑनलाईन लिंक जनरेट कर दिया जायेगा। वर्तमान में संचालित 200 कालेजों को इन उपबंधों से छूट देने के लिये प्रशासकीय आदेश जारी किये जायेंगे।

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