डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश में 217 स्वसहायता समूहों को बैंक खातों की गड़बड़ी से स्कूल ड्रेस बनाने की राशि नहीं मिल पाई है। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक एस धनराजू ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि राज्य ग्रामीण अजीविका मिशन के 136, राज्य शहरी अजीविका मिशन के 30 तथा महिला बाल विकास निगम के 51 शालाओं से संबंधित स्वसहायता समूह के खाते में त्रुटि होने से तथा संबंधित विभाग के जिला प्रमुख के द्वारा खातों मे सुधार न होने के कारण अभी तक उन खातो मे राशि प्रदाय नहीं की जा सकी है। राज्य शहरी आजीविका मिशन के 64 खातो मे संबंधित जिला प्रमुख के द्वारा सुधार उपरांत राशि प्रदान की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जिन विभागो के खाते अभी भी सुधार हेतु लंबित है उनमे तत्काल एसजीएच जीविका पोर्टल में सुधार हेतु कार्यवाही पूर्ण की जाये जिससे संबंधित स्व सहायता समूह को राशि प्रदाय की जा सके। अभी तक स्वसहायता समूह द्वारा लक्ष्य के विरूद्ध तैयार गणवेश 93 प्रतिशत है तथा शाला प्रबंधन समिति के द्वारा प्राप्त गणवेश 80 प्रतिशत है।
संचालक ने बताया है कि सत्र 2020-21 में शासकीय विद्यालयों में (कक्षा 1 से 8) अध्ययनरत छात्र छात्राओं को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूह के माध्यम से गणवेश प्रदाय हेतु राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है। एसजीएच जीविका पोर्टल के माध्यम से शालावार गणवेश प्रदाय हेतु स्वसहायता समूह को कार्यादेश जारी किये गये। पोर्टल के माध्यम से छात्रों की गणना अनुसार संबंधित विभाग द्वारा सत्यापित स्वसहायता समूह के खाते में दो जोड़ी गणवेश हेतु 600 रुपये प्रति छात्र की दर से प्रावधानित राशि के विरूद्ध 75 प्रतिशत की राशि संबंधित स्वसहायता समूह के खाते में राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जारी की गई है। पोर्टल के माध्यम से गणना अनुसार कुल 1 लाख 474 शालाओं के लिये 58 लाख 56 हजार 668 छात्रों को गणवेश प्रदाय आदेश स्वसहायता समूह को जारी किये गये। 600 रुपये प्रति छात्र की दर से कुल प्रावधानित राशि 351 करोड़ 40 लाख 800 रुपये है, जिसके विरूद्ध 75 प्रतिशत की राशि संबंधित स्वसहायता समूह के खाते में प्रदाय हो चुकी है।
संचालक ने गणवेश प्रदाय हेतु शेष 25 प्रतिशत राशि के प्रस्ताव एवं भुगतान के संबंध में कहा है कि कलेक्टर के माध्यम से 25 प्रतिशत की राशि भुगतान के संबंध में प्रस्ताव राज्य शिक्षा केन्द्र को प्रेषित किया जाये। प्रस्ताव पत्र के साथ, 25 प्रतिशत की मांग एवं गणवेश प्रदाय का विवरण जिला स्तरीय समिति के द्वारा गणवेश की रेन्डम गुणवत्ता सत्यापन का प्रतिवेदन एवं 75 प्रतिशत राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र अनुसार संलग्न कर प्रेषित किया जाये। जिले से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर शेष 25 प्रतिशत की राशि के भुगतान हेतु जिले को अधिकृत किया जा सकेगा। ऐसे स्व सहायता समूह जिनके द्वारा विद्यालय को प्रदय की गई ड्रेस की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है तो विद्यालय, स्व सहायता समूह को ड्रेस वापस करेगा तथा समूह के द्वारा गुणवत्ता युक्त ड्रेस रिप्लेस की जायेगी।

कोर्ट द्वारा लगाई कॉस्ट की अब वित्त विभाग को जानकारी देनी होगी

राज्य सरकार ने वित्त संहिता-1 में नया संशोधन कर दिया है। इसके अनुसार, अब विभागों को न्यायालीयन आदेशों के पालन में कॉस्ट के भुगतान की भी जानकारी वित्त विभाग को देनी होगी।
दरअसल विभागों को पहले यह अधिकार था कि वे अपने यहां नियोजित कार्मिकों के व्यक्तिगत स्वत्वों के प्रकरणों को छोडक़र न्यायालीयन आदेशों के पालन में ब्याज तथा शास्ति के भुगतान की जानकारी वित्त विभाग को दें। इसमें न्यायालय द्वारा लगाई कॉस्ट की जानकारी वित्त विभाग को देना जरुरी नहीं था। इसीलिये अब वित्त संहिता में संशोधन कर कॉस्ट की जानकारी भी वित्त विभाग को देना जरुरी कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि न्यायालय पर समय पर उपस्थित न होने या समय पर जवाब न देने या अन्य कारणों से न्यायालय द्वारा कई बार कॉस्ट (एक प्रकार का जुर्माना) लगाया जाता है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि वित्त संहिता में विभागों द्वारा न्यायालयीन आदेश पर कॉस्ट के भुगतान की जानकारी वित्त विभाग को पृष्ठांकित करने का प्रावधान नहीं था, इसीलिये अब इसका भी प्रावधान कर दिया गया है, ताकि वित्त विभाग की जानकारी में भी ऐसे मामले हों।

 

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