पीएम मोदी यूं तो दुबई एक्सपो 2020 में शामिल होने के लिए जाएंगे, लेकिन इस यात्रा मेन मकसद दोनों ही सहयोगियों को कोरोना की दूसरी लहर के वक्त भारत के साथ खड़े रहने और अपने यहां रहने वाले भारतीय नागरिकों का ख्याल रखने के लिए आभार जताना होगा। यूएई में करीब 40 लाख भारतीय पासपोर्ट धारक रहते हैं तो वहीं, कुवैत में यह संख्या करीब 10 लाख है।

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जाएद अल नहयन के न्योते पर साल 2015 में यूएई की पहली यात्रा करने के बाद से बी पीएम मोदी का ध्यान पूरी तरह से अबु धाबी के साथ रिश्तों को सुधारने पर केंद्रित है। बीते रविवार को ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूएई दौरे से लौटे हैं। बता दें कि व्यापार में अमेरिका और चीन के बाद यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा भागीदार है। जनवरी की यात्रा पीएम मोदी का चौथा यूएई दौरा होगा, जबकि पीएम मोदी से पहले इंदिरा गांधी यूएई का दौरा करने वाली आखिरी भारतीय पीएम थीं।

यूएई की तरह ही भारत के कुवैत से भी प्रगाढ़ संबंध हैं। जिस समय भारत कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा था, उस समय कुवैत ने बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपकरण भेजकर भारत की सहायता की थी। इतना ही नहीं, कुवैत के सपोर्ट के लिए धन्यवाद कहने के लिए पीएम मोदी द्वारा कुवैती अमीर शेख नवफ अल-अहमद को लिखी चिट्ठी खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर लेकर पहुंचे थे।

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