कृषि के क्षेत्र में केंद्र सरकार के प्रस्तावित कानूनों पर राष्ट्रीय किसान महासंघ के संयोजक शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजू’ से बातचीत

भोपाल. इंडिया डेटलाइन.

केन्द्र की मोदी सरकार यदि फ़सलों के समर्थन मूल्य को क़ानून का हिस्सा बना दे तो कृषि से जुड़े अध्यादेशों का विरोध मुल्तवी कर दिया जाएगा। किसान को इन अध्यादेशों की आड़ में समर्थन मूल्य की व्यवस्था छिनने का ख़तरा नजर आ रहा है।

यह बात मध्यप्रदेश के किसान नेता और किसानों के राष्ट्रीय महासंघ के संयोजक शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजू’ ने कही। उनका कहना है कि ये अध्यादेश खेती-किसानी की पारंपरिक और किसान हितैषी व्यवस्था को नष्ट कर देंगे और कृषि के क्षेत्र में कॉरपोरेट की बुराइयों का प्रवेश करा देंगे। 

कक्काजू ने ‘इंडिया डेटलाइन’ से बातचीत में किसान आंदोलन से जुड़े सवालों के जवाब दिए। वे कृषि के मामले में मोदी सरकार के सख़्त आलोचक हैं। उनका कहना है कि नरेन्द्र मोदी ने किसानों से संबंधित जितनी घोषणाएँ कीं वे सब ‘फ्रॉड’ हैं। किसी पर अमल नहीं किया गया। उनके छह साल के कार्यकाल में किसान विरोधी 32 निर्णय लिए गए। हाल में लोकसभा में पारित तीन अध्यादेशों के पीछे भी उनकी मंशा ठीक नहीं है। इसलिए बड़ा संकट विश्वास का है। समर्थन मूल्य (MSP) को क़ानूनी जामा पहनाने से यह संकट दूर हो जाएगा।लेकिन कक्काजू विपक्ष से भी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि अध्यादेश चार महीने से चर्चा में है, विपक्ष के नेताओं ने क्या किया? यदि वे समय रहते इसका विरोध करते तो आज यह नौबत न आती कि कई राज्यों के किसान कोरोना की अनदेखी करते सड़कों पर उतर आए हैं।

यह पूछे जाने पर कि पंजाब व हरियाणा के किसानों की समस्या अलग है। पंजाब में आंदोलन को राज्य सरकार का समर्थन प्राप्त है। मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में ऐसा नहीं है तो यहाँ किसान विरोध नहीं कर रहा है। शर्मा ने कहा कि मप्र के किसान सजगता, संगठन और सार्वजनिक रूप से अपने मुद्दों को उठाने में पीछे है। इसीलिए हमने सबसे पहले सरकार के प्रस्तावित क़ानूनों पर जनता को जगाने का काम हाथ में लिया है। 

वैसे इन मुद्दों पर देश भर में काम चल रहा है। 21 सितंबर को दक्षिण भारत के राज्यों के किसान नेता बेंगलुरू में इकट्ठा हो रहे हैं। हमने हर संसद सदस्य को लिखा है कि यदि तीन अध्यादेश पारित हुए तो किसानों के हितों पर चोट करने के लिए वे ज़िम्मेदार होंगे। कक्काजू ने मप्र के मॉडल मंडी एक्ट का विरोध करने के लिए भी विधायकों से अपील की है। मप्र विधानसभा के आगामी एक दिनी अधिवेशन में यह एक्ट रखा जाने वाला है।

किसान नेता शर्मा ने केन्द्र के अध्यादेशों पर कहा कि इनके लागू होने पर किसान की खेती को अनुबंध पर बड़े पूँजीपति व उद्योगपति ले सकेंगे। वे कम साक्षर किसानों से अंगरेजी में कांट्रेक्ट करेंगे जिससे उलझनें बढ़ेंगी। वे उसकी खेती का क्या करेंगे, यह संबंधित किसान भी नहीं जान सकेगा। इस तरह किसान की समस्याएँ बढ़ेंगी। प्राइवेट मंडियाँ किसानों को खींच ले जाएँगी जिससे सरकारी मंडियों की किसान हितैषी सुविधा का स्थान लूट-खसोट वाली व्यवस्था ले लेगी। व्यापारी गिरोह बनाकर किसान का किस हद तक शोषण करेंगे, यह अभी कल्पना से परे है।

तो समर्थन मूल्य का वादा का कानून में शामिल करवाकर इन समस्याओं को आप ठंडे बस्ते में नहीं डाल रहे हैं? पूछने पर कक्काजू ने कहा-अभी फ़ौरी डर को खत्म करना है। बाद में इस मुद्दों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here