प्रशांत रायचौधरी

इंग्लैंड के वित्तमंत्री ने एक पत्रकार को सिगरेट पीते हुए देख कर कहा कि  भविष्य में इतना धुआं नहीं उड़ा सकोगे। पत्रकार अखबार के दफ्तर पहुंचा व खबर तान दी कि सिगरेट पर टैक्स बढ़ने वाला है,सावधान। बस फिर क्या था वित्तमंत्री को पद से हटना पड़ा । और हमारे यहां.. मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया के सामने डंके की चोट कहा कि मैं मास्क पहनता ही नहीं, मैं हर जगह बगैर मास्क पहन कर जाता हूं। उन्होंने इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार इस सलाह को, कि मास्क पहनिए,सोशल डिस्टेंसिंग रखिए को चुनौती दे दी। क्या यही अभिव्यक्ति की आजादी है। क्या गृहमंत्री को इतना गैर जिम्मेदार होना चाहिए। इंदौर में कोरोना संक्रमित सबसे ज्यादा हैं। वे यहां आकर सीना तान रहे हैं। उनसे तो पूछा ही जाना चाहिए कि आपने ऐसा क्यों कहा। कल ही तो अखबार में छपा था कि एक देश  ऐसा भी है जिसने कड़ाई से मास्क पहनने का पालन किया जिससे वहां कोरोना का फैलाव नहीं हो सका।

”मैं कभी भी मास्क नहीं पहनता, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है.” उनके इस कथन से आम लोगों में क्या संदेश जा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है। डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा पीएचडी हैं। इतने पढ़े-लिखे होने के बाद भी उन्होंने गैरजिम्मेदाराना व्यवहार किया है। उन्हें भविष्य का मुख्यमंत्री कहा जाता है। क्या वे इस पद के लायक हैं। क्या कांग्रेस को नहीं चाहिए कि उपचुनाव में जनता के बीच बताएं कि प्रदेश का गृहमंत्री कितने गैर जिम्मेदार है। डॉ. नरोत्तम ने अपने कथन से यह जताने कि कोशिश की कि मैं निरंकुश हूं। मास्क बगैर पहनना चोचलेबाजी है। आखिर ये नेता इतने निरंकुश क्यों हो जाते हैं।  उन्होंने जो कुछ कहा उसे भड़काने की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। इससे यह भी मालूम पड़ता है कि उन्हें नरेंद्र मोदी का डर बिल्कुल भी नहीं है। यदि डर होता तो वे कभी नहीं कहते कि मैं किसी भी कार्यक्रम में मास्क नहीं पहनता हूं। वे ऐसा कह कर प्रधानमंत्री मोदी व कोरोना वायरस को सीधे चुनौती दे रहे हैं कि मेरा क्या उखाड़ लोगे। हो सकता है कि नरोत्तम मिश्रा यह कहना चाहते हो कि कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना जरूरी नहीं है। वे ऐसा कहकर मानो विश्व समुदाय को ही चुनौती दे रहे हैं।

     क्या प्रधानमंत्री को उन्हें तलब नहीं करना चाहिए। या फिर उन्हें ढोते रहने की कौन सी मजबूरी है।नरोत्तम मिश्रा मास्क पहनने से हमेशा ही परहेज करते रहे हैं। अप्रैल में मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य और गृहमंत्री बनने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा राजधानी भोपाल से जब पहली बार अपने घर दतिया पहुंचे थे तब उनके घर में चौखट पर उनकी आरती उतारी गई थी, टीका लगाया गया था, लेकिन इस दौरान ना तो उन्होंने और ना ही आरती करने वालों ने मास्क पहना था जबकि आसपास काफी भीड़ थी।

गृहमंत्री ने इंदौर की मीडिया के सामने तथा रवींद्र नाट्यगृह में कहा कि मास्क नहीं पहनना कौन सी बड़ी बात है लेकिन भोपाल पहुंचते ही स्वर बदल गए। कहने लगे कि सांस लेने में दिक्कत होती है इसलिए कभी-कभी नहीं पहनता हूं। उनके मंत्रीमंडल के 12 मंत्रियों को कोरोना संक्रमित होने के बाद भी उनकी बेशर्मी निंदनीय है। दैनिक भास्कर ने ठीक ही किया जो उनके चेहरे को विरोध स्वरूप हटा दिया। लोगों को गलत संदेश देने वाले नरोत्तम मिश्रा को पद से हटाने का साहस भाजपा में क्यों नहीं है?

आखिर इन नेताओं को क्या हो जाता है? देश में तो बिगड़े बोल वाले नेताओं की भरमार है जो अपनी सामाजिक जिम्मेदारी नहीं समझते हैं। प्रज्ञा सिंह ठाकुर, गिरिराज सिंह, तेजस्वी सूर्या, आजम खान,  ओवैशी, दिग्विजय सिंह जैसे अलोकप्रिय नेता  जो किसी मंत्रिमंडल में नहीं है इसलिए इन्हें एक बार नजरअंदाज किया जा सकता है लेकिन नरोत्तम मिश्रा को कतई नहीं। क्या द्स्युओं के लिए परिचित चंबल का खून बागी प्रवृत्ति का ही होता है। 

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