संध्या  रायचौधरी


नाटककार बर्नार्ड शॉ ने महात्मा गांधी के बारे में कहा था कि आने वाली पीढ़ियां बड़ी मुश्किल से विश्वास कर पाएंगी कि कभी संसार में ऐसा व्यक्ति भी रहा होगा, जो आधुनिक स्वतंत्र भारत के पिता, नवराष्ट्र के निर्माता और भाग्य-विधाता ऐसी विविधताएं लिए कोई अनूठा व्यक्ति भारत में जन्मा होगा। गांधी इस पूरी धरती का स्वाभिमान थे। वे सेवा की साधना थे। वे ईश्वर, देवता, अवतार, संत कुछ नहीं थे। वे तो इंसान और इंसानियत के नए संस्करण थे।

बीसवीं सदी के महान उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल ने अपने एक निबंध, ‘गांधी : कुछ विचार’ में कहा है- गांधी को लेकर सवाल यह है कि गांधी किस हद तक ऐसे संतत्व से एक विनम्र और चेतनाशील फकीर के रूप में संचालित थे, जो बिना संत हुए भी चटाई पर बैठकर प्रार्थना गाते-गाते दुनिया के सबसे बड़े, तगड़े और ताकतवर साम्राज्य को अपनी आत्मा की ताकत से हिला रहे थे। गांधी बिना संतत्व का बाना पहने, बिना अवतार, पीर, पैगम्बर कहलाए, बिना किसी धर्म, मजहब या रिलीजन को छोटा या बड़ा बताए।

  • गांधी में अनेक महान आत्माएं

गांधी चेतना का चिंतन थे और चिंतन की चिंता थे। वे मानते थे कि जिस देश या समाज के पास चिंतन और चेतना नहीं, वह ज्ञान और सेवा का देश या समाज नहीं बन सकता। गांधी में अनेक महान आत्माएं एकाकार होती थीं। उनमें महर्षि अरविंद का मानस था, रामकृष्ण परमहंस-सी भक्ति, विवेकानंद-सा देशप्रेम, रामतीर्थ-सी मेधा, क्रांतिकारियों के जैसा साहस और राममोहन राय, गोखले, तिलक जैसी ज्ञान के प्रति आस्था। इन सबका समन्वय थे गांधी। इसलिए गांधी प्रकृति भी थे, पुरुष भी, नैतिक भी थे और नेतृत्व में नीतिवान भी। संयम उनकी साधना थी, नियम उनकी नैतिकता थी और यम उनका लोक व्यवहार था।

 गांधी ने अपने जीवन में तीन आदर्शों को खास तवज्जो दी–

* पहलासामाजिक गंदगी को दूर करने के लिए झाड़ू का सहारा। 

* दूसरासामूहिक प्रार्थना को बल देना, जिससे एकजुट होकर व्यक्ति जातपात और धर्म की बंदिशों को दरकिनार कर प्रार्थना करें।
*
तीसराआखिरी रास्ता चरखा। यह आत्मनिर्भर और एकता का प्रतीक माना जाने लगा था। 

                विश्वभर के विद्वानों की नजर में गांधी

अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित करने वाले बापू के बारे में विश्वभर के विद्वानों ने क्या-क्या कहा है आइए जानते हैं-

– -‘आने वाली पीढ़ियां इस बात पर शायद ही यकीन करेंगी कि हाड़-मांस का बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति किसी समय इस पृथ्वी पर आया था’ ।. ‘महात्मा गांधी ऐसे विजयी योद्धा रहे जिसने बल प्रयोग का सदा उपहास उड़ाया। वह बुद्धिमान,नम्र,दृढ़संकल्पी और निश्चय के धनी व्यक्ति थे’। (अल्बर्ट  आइंसटाइन)

-‘गांधीजी के प्रभाव? आप हिमालय के कुछ प्रभावों के बारे में पूछ सकते हैं” । ( बर्नार्ड शॉ)

-”महात्मा  गांधी को इतिहास में महात्मा बुद्ध और ईसा मसीह का दर्जा प्राप्त होगा’.( माउंटबेटन)

-‘अन्य अधिकांश लोगों के समान मैंने भी गांधी को सुना है,परन्तु मैंने कभी गंभीरतापूर्वक उनका अध्ययन नहीं किया। जब मैंने उन्हें पढ़ा तो मैं अहिंसा के प्रतिरोध पर आधारित उनके अभियानों को देखकर चकित रह गया। उनकी सत्याग्रह की संपूर्ण संकल्पना मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी’। (डॉ.मार्टिन लूथर किंग,जूनियर )

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