नई दिल्ली. इंडिया डेटलाइन.

Harvey Alter, Michael Houghton and Charles Rice ने नोबेल पुरस्कार जीता

हेपेटाइटिस सी के वायरस की खोज के लिए तीन वैज्ञानिकों को इस वर्ष चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। यदि भारत में इस पर किया जा रहा शोध बीच में न रुकता तो यह पुरस्कार भारतीय वैज्ञानिकों की झोली में भी आ सकता था। 

हेपेटाइटिस सी के वायरस को खोजने के लिए इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार दो अमेरिकी व एक ब्रिटिश वैज्ञानिक को संयुक्त रूप से मिला है। नोबेल पुरस्कार में तीनों वैज्ञानिकों को 1.1 मिलियन डॉलर अर्थात 8 करोड़ 04 लाख 70 हजार 500 रुपए का इनाम मिलेगा। हेपेटाइटिस सी से दुनिया के 7 करोड़ लोग प्रभावित हैं और हर साल 4 लाख मौतें होती हैं। हेपेटाइटिस के शोध पर दूसरी बार नोबेल पुरस्कार दिया गया है। पहली बार 1976 में बरूच ब्लूमबर्ग ने यह पुरस्कार जीता था।

 एक अंगरेजी दैनिक के अनुसार भारत में भी हैपेटाइटिस वायरस की खोज की दिशा में 90 के दशक में महत्वपूर्ण काम हुआ था लेकिन गम यह है कि वह काम आगे नहीं बढ़ा। हैदराबाद की शांता बायोटेक ने डीएनए आधारित हेपिटाइटिस बी वैक्सीन की डीएनए-जीनोम तैयार की थी और इस काम के लिए अमेरिका स्थित भारतीय मूल के वैज्ञानिक को आर्थिक मदद की थी जिसने भारतीयों में मौजूद हेपेटाइटिस सी वायरस की जीनोम की सीक्वेंसिंग पता कर ली थी लेकिन उसके बाद इस पर कोई काम नहीं हो सका। शांता बायोटेक के संस्थापक डॉक्टर वारा प्रसाद रेड्डी ने बताया 2001 तक इस पर काम हुआ लेकिन किन्हीं कारणों से इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। 

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