इंदौर /कीर्ति राणा

बदनावर में कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किए जाने वाले दिन से ही माना जा रहा था कि यहां किसी अन्य को मैदान में उतारा जाएगा। वही हुआ है, पहले अभिषेकसिंह टिंकू बना को घोषित किया था लेकिन आज उनकी जगह कमलसिंह पटेल का नाम घोषित कर दिया है।कांग्रेस के इस बदलाव के बाद भी मुकाबला ठाकुर विरुद्ध ठाकुर ही रहना है।कमल पहचाने जरूर पटेल (पाटीदार) के रूप में हैं लेकिन मूल रूप से वो सोलंकी (गुजराती राजपूत) हैं।बदनावर में कांग्रेस द्वारा प्रत्याशी बदले जाने के इस निर्णय से दिग्विजय सिंह खेमे को बड़ा झटका लगा है।पटेल का नाम घोषित करवा कर उमंग सिंगार ने दिग्विजय खेमे को क्षेत्र में अपनी ताकत का अहसास भी करा दिया है क्योंकि वो संकेत दे चुके थे कि कमल पटेल को टिकट नहीं दिया गया तो वे चुनाव तक बदनावर से दूरी बना लेंगे।

भाजपा ने इस बार राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव को प्रत्याशी बनाया है उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया कोटे में टिकट मिला है। कांग्रेस ने जिस टिंकू बना का पहले नाम घोषित किया था उनके खाते में बड़ी उपलब्धि के नाम पर शिवराज-सिंधिया की हाल की बदनावर यात्रा में समर्थकों के साथ उन्हें काले झंडे दिखाना ही है। दत्तीगांव ने विधायक रहते टिंकू बना परिवार को कांग्रेस सदस्यता से निष्कासित कराने जैसी कार्रवाई की थी, इसके बाद भी उन्हें प्रत्याशी घोषित किए जाने का क्षेत्र के कांग्रेसजन खुल कर विरोध कर रहे थे। टिंकू बना के पिता एडवोकेट जीपी सिंह का बदनावर में दबदबा तो रहा लेकिन दत्तीगांव के पॉवर में आने के बाद इसी परिवार को दलगत स्तर पर परेशानियों से भी जूझना पड़ा है। अब जब उनकी जगह कमल पटेल को टिकट दे दिया है तब भी टिंकू बना की मजबूरी होगी कांग्रेस के लिए काम करना क्योंकि उन्हें दत्तीगांव से पुराने हिसाब चुकते करना है।कमल पटेल परिवार का प्रेम सिंह दत्तीगांव से लेकर राज्यवर्द्धन सिंह को राजनीतिक रूप से मजबूत करने में योगदान रहा है इस वजह से भी अब जब कमल पटेल को मौका दिया है तो आम कांग्रेसजन अधिक खुश है।दावेदारी में जिला कांग्रेस अध्यक्ष बीके गौतम के पुत्र मनोज का भी नाम था लेकिन कमल पटेल का नाम घोषित कर कांग्रेस ने स्थानीय प्रत्याशी वाली मांग का सम्मान किया है।दूसरी तरफ भाजपा द्वारा दत्तीगांव को टिकट देने, राजेश अग्रवाल की पुन:भाजपा में वापसी को लेकर पूर्व विधायक भंवरसिंह शेखावत भी तल्ख तेवर दिखा चुके हैं।टिकट चेंज होने के बाद से शेखावत खेमा यह कहते हुए उत्साहित नजर आया कि मजा तो अब आएगा, टिंकू बना तो हल्का प्रत्याशी था।

खाता न बही, जो कमलनाथ कहे वह सही

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने पिछला चुनाव जिस तिकड़ी की मेहनत से जीता था उसमें से सिंधिया तो भाजपा के हो गए हैं।कमलनाथ और दिग्विजय सिंह में अब वो ‘राजनीतिक याराना’ नहीं रहा है। यह ठीक है कि सिंह राज्यसभा सदस्य हो गए हैं लेकिन मप्र में कांग्रेस की गाड़ी में ट्रक और साइकिल के पहिये जैसी स्थिति बन चुकी है।शिवराज सरकार के सत्ता में आने के बाद नेता प्रतिपक्ष के लिए दिग्विजय सिंह चाहते थे कि डॉ गोविंद सिंह को यह दायित्व मिले। कमलनाथ खेमा एनपी प्रजापति के पक्ष में था।विरोध बढ़ता देख कमलनाथ ही बन गए लेकिन इस घटना ने दोनों दिग्गज नेताओं की राह में दूरी बढ़ा दी। आज मप्र के 29 उपचुनाव वाले क्षेत्रों में से अधिकांश नाम कमलनाथ की मर्जी से घोषित हुए हैं।दिग्विजय सिंह के गृह क्षेत्र ब्यावरा से नाम फायनल की जिम्मेदारी दिग्विजय सिंह पर छोड़ी गई थी, उन्होंने जिला कांग्रेस अध्यक्ष जयवर्धन सिंह को अधिकृत कर दिया है।

आज की स्थिति में मप्र में कांग्रेस के सारे निर्णय कमलनाथ ही ले रहे हैं। जिस ग्वालियर चंबल संभाग की रग रग से डॉ गोविंद सिंह वाकिफ है वहां नाथ खेमे के सज्जन वर्मा, एनपी प्रजापति भटक रहे हैं।मप्र कांग्रेस के इतिहास में ऐसे हालात पहली बार बने हैं एकाधिक बार कराए सर्वे के आधार पर कमलनाथ जो सूची कांग्रेस आलाकमान के सामने पेश करते हैं उसे एक झटके में मंजूरी भी मिल रही है। चुनाव प्रबंध समिति, प्रदेश कांग्रेस समिति, कांग्रेस प्रभारी, सर्वे आदि सब कमलनाथ में समाहित हैं।

बदनावर विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या ,जातिगत मतदाता

35 हजार के करीब राजपूत, इतने ही 35 पाटीदार मतदाता है। 17हजार के करीब जैन समाज, 19 हजार के करीब मुस्लिम, 65 हजार के करीब आदिवासी व अन्य समाज के लोग विधानसभा में हैं। कुल जनसंख्या दो लाख के आसपास है।

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