-राजनीति प्रसाद 

जाने-माने कवि कुमार विश्वास को इस समय राजनीतिक पार्टियाँ शक की निगाहों से देख रही हैं। उनकी धर्मपत्नी को राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य बना दिया है। चर्चा है कि इस रिश्वत में कवि हृदय बिक गया। कुमार ‘आप’ पार्टी छोड़ने के बाद से किसी दल में नहीं थे लेकिन भाजपा की तरफ झुकाव नजर आने लगा था। कहते हैं ऐसे में कांग्रेस ने उनसे सौदा पटा लिया। कहा जा रहा है कि उत्तरप्रदेश में उनके ब्राह्मण चेहरे का इस्तेमाल किया जाएगा। वे उप्र के ग़ाज़ियाबाद के रहने वाले हैं जबकि उनकी पत्नी अजमेर के माली समाज से हैं। श्रीगंगानगर के कॉलेज में दोनों व्याख्याता थे। जिसके बाद जीवन साथी बने। 

राजनीति में अपशब्दों का शब्दकोश 

नवरात्रि की शुरुआत पर राहुल गांधी ने कहा- ‘आज के युग में नारी का सम्मान करना देवी का पूजन करने जितना ही आवश्यक है।’ और दूसरे ही दिन उनके उनके बड़े नेता ने चुनावी सभा में भाजपा की महिला मंत्री को ‘आइटम’ कह दिया। भाजपा ने इसे तत्काल मुद्दा बना दिया। शिवराज, विष्णुदत्त शर्मा व ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तत्काल अगले दिन यानी सोमवार को उपवास करने की घोषणा कर दी। यह संयोग है कि सोमवार को ही ‘मानवीय गरिमा दिवस’ है। वैसे तीन दिन पहले ही भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय दिग्विजय-कमलनाथ को ‘चुन्नू-मुन्नू’ कह चुके हैं। 

राज्यपाल के शब्दों पर अमित शाह ख़फ़ा

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी।  शिवसेना चिट्ठी के मज़मून पर भड़की है। राज्यपाल ने ठाकरे के हिंदुत्व बनाम धर्मनिरपेक्षता का मजाक उड़ाया था। गृहमंत्री  अमित शाह राज्यपाल द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से नाख़ुश हैं। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कोश्यारी का शब्दों का चयन ठीक नही था। अब भाषा कितनों को सिखाएँगे अमित शाह। राज्यपाल हों या मंत्री गिरिराज सिंह, सब तो एक ही क्लास से निकले हैं। कार्यकर्ता भी उन्हीं वरिष्ठों के पीछे चलते हैं। 

कमलनाथ तुम कहाँ से आए

चुनाव में पेड़ की जड़ें तक खोद दी जाती हैं। भाजपा ने कमलनाथ का इतिहास खंगालना शुरू कर दिया। वह सिख दंगों में भूमिका पर तो सवाल उठा ही रही थी, अब ज्योतिरादित्य ने हाट पिपल्या की सभा में पूछा-कमलनाथ तुम कहाँ से आए? कहीं-कहीं उनकी जाति को लेकर भी सवाल उठाया गया। कमलनाथ कानपुर में जन्मे, कोलकाता में परवरिश हुई, दिल्ली में राजनीति की, मध्यप्रदेश से चुनाव लड़े। मध्यप्रदेश मूल के नहीं है। शिवराज सिंह ने पिछले दिनों यही बात कही थी। एक सभा में गाना बजाया गया-तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे..। 

चिराग़ को प्रशांत किशोर की सलाह 

चुनाव रणनीति के चाणक्य के रूप में मशहूर प्रशांत किशोर गायब हैं। ऐन बिहार के चुनाव के वक्त। जिस बिहार में उन्होंने राजनीतिक पारी शुरू की थी। भले ही इस चुनाव में  किसी ने इनकी सेवाएँ नहीं ख़रीदीं लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि उनका हाथ किसके साथ है। ज्यादातर वे संभावित विजेता के साथ रहे हैं। खबर है कि रामविलास पासवान के बेटे चिराग़ ने उन्हीं के कहने पर दाँव लगाया। चिराग़ एनडीए से अलग होकर लड़ रहे हैं। किशोर की सलाह थी कि समाजवादी व जेपी आंदोलन की पीढ़ी के लिए यह आखिरी चुनाव है इसलिए वे उससे चिपके रहने की बजाय नया रास्ता तैयार करें, मंज़िल मिलेगी।

कमलनाथ की कैसी सफाई-हम सब आइटम हैं

‘मैं क्या नाम लूँ। क्या आइटम है ये’- कह तो दिया कमलनाथ ने, पर अब लेने के देने पड़ गए। ऐसा ही शिवराज को कांग्रेस नेता दिनेश गुर्जर द्वारा ‘भूखे-नंगे घर का’ कहने पर हुआ। भाजपा ने ‘मैं हूँ शिवराज’ मुहिम चला दी। अब कांग्रेस इमरती देवी को आइटम कहने वाले बयान की सफाई देती घूम रही है। एक मीडिया सलाहकार ने कहा कि कमलनाथ ने इमरती देवी का नाम नहीं लिया। इंदौर की एक न्यूज वेबसाइट ने कमलनाथ को उद्धृत कर उनकी जो सफाई दी, वह और भी बचकानी है। उसके मुताबिक कमलनाथ ने कहा-हाँ, मैंने आइटम कहा है क्योंकि यह कोई असम्मानजनक शब्द नहीं है। मैं भी आइटम हूँ, आप भी आइटम हैं, हम सब आइटम हैं। विधानसभा में तो कार्यसूची को आइटम नंबर ही लिखा जाता है। 

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