महान व्यक्तियों की प्रेरक आत्मकथाओं के संग्रह में नरेंद्र मोदी के साथ डॉ होरा की जीवनी भी शामिल

इंदौर| इंटरनेशनल पब्लिशिंग हाउस प्रूडेंट पेन,  स्वर्ण भारत परिवार के संयुक्त प्रयास से ” द मोस्ट इंस्पायरिंग पीपल ऑफ अर्थ 2020 ” अवार्ड कार्यक्रम में विश्व के 101 महान व्यक्तियों की प्रेरक आत्मकथाओं का संग्रह , ” गोल्डन बुक ऑफ द अर्थ ” का वैश्विक स्तर पर वर्चुअल विमोचन किया गया| वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित 20 देशों के राष्ट्र प्रमुखों की प्रेरक आत्मकथाओं के साथ कुल 101 महान व्यक्तियों की जीवनी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित व प्रसारित की गई|

प्रसन्नता की बात है कि ” गोल्डन बुक ऑफ अर्थ” में इंदौर की साहित्यकार डॉ दविंदर कौर होरा की जीवनी और उनके फर्श से अर्श तक पहुंचने के सफर को भी शामिल किया गया है|डॉ दविंदर कौर ने इस संबंध में बताया कि ” यह वैश्विक चेंजमेकर्स की गौरवशाली गाथा, और भारत के विशेष कर्मयोगियों की कहानियां हैं इसलिए कई मायनों में यह पुस्तक अनोखी है |इसमें विषम परिस्थितियों में प्रेरणादायक कार्य करने वालों की रोचक कहानियां हैं जो आपको झकझोर देंगी और सोचने को मजबूर कर देंगी कि क्या वाकई में आप अपने इंसान होने का फर्ज निभा रहे हैं |

 विश्व के 10 देशों के लेखकों द्वारा लिखित इस पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही 20 देशों के राष्ट्रपति , प्रधानमंत्रियों के अलावा अभिनेता सोनू सूद , जयशंकर प्रसाद, नितिन गडकरी , मनीष सिसोदिया आदि की जीवन गाथा को स्थान दिया गया है| ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैंड घाना आदि देशों के प्रेरणास्पद लोगों की कहानियां हैं।

डॉ. होरा ने बताया कि वर्चुअल कार्यक्रम में प्रेरणादायक कार्य करने वाले सभी सम्मानितों ने अपने संघर्ष की गाथा के साथ ही आगे की योजनाओं पर चर्चा की | उन्होंने विश्व मंच पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ” भगवान के द्वारा नवाजे गए दो हाथों में से एक हाथ में मैंने कलम को तलवार की तरह थामा है जिससे मैं गरीबों पर हो रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठा रही हूं , और लोगों को जागरुक कर रही हूँ, तथा मेरे दूसरे हाथ में विद्या का दीपक जल रहा है जो विश्व से निरक्षरता को मिटाने का कार्य सतत कर रहा है | आपने विश्व मंच से अपील की कि “सभी साथ मिलकर पोर्न और अल्कोहल के खिलाफ जंग लड़ने में शामिल हों , जो युवाओं की रगों में जहर की तरह दौड़ रहा है और विश्व को खोखला कर रहा है|  वहीं दो चीजों का सपोर्ट करें.. अच्छी पुस्तकें और हर हाथ को काम मिले | आपने कहा कि मेरी ख्वाहिश है कि हर पेट अनाज हो और हर हाथ काम हो |

उनकी उपलब्धि पर शहर की कई साहित्यिक संस्थाओं ने बधाइयां प्रेषित की| डॉ होरा के महत्वपूर्ण कार्यों को एक पुस्तक के रूप  में समाहित करने के प्रस्ताव उन्हें दिए गए। दिल्ली की ख्यात लेखिका निशिगंधा उनके जीवन वृतांत को नावेल के रूप में लिखने के लिए उत्सुक हैं | डॉक्टर होरा की उपलब्धियों से उनके परिजन एवं सिख समाज में खुशियों की लहर है  |   डॉ. होरा  साहित्य कलश संस्था की अध्यक्ष एवं काव्य कुंज पत्रिका  की प्रधान सम्पादक हैं |

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