मामला कैमूर जिले के भगवानपुर सीएचसी का

भगवानपुर कैमूर। सरकार द्वारा गरीबों के लिए समुचित इलाज एवं व्यवस्था के लिए अस्पताल बनाया गया है। जहां हर प्रकार की सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही है। वही अस्पतालों में डॉक्टर व एएनएम सहित कई कर्मियों  को भी नियुक्त किया गया है। गांव में गरीब लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी दिलाने के लिए आशा कर्मियों को भी लगाया किया गया है। लेकिन कैमूर में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं में जांच कराने के नाम पर कमीशन का खेल चल रहा है। मरीज का आरोप है कि यह मामला तब उजागर हुआ जब एक महिला मरीज अपना इलाज कराने के लिए भगवानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंची और पर्ची कटा कर डॉक्टर मैडम को दिखाया।

डॉक्टर मैडम ने उस महिला की पर्ची को देखने के बाद उससे जानकारी प्राप्त कर उसे एक जांच कराने के लिए लिखा। जो उसी अस्पताल में होता है। जब वह महिला अपने गांव के ही आशा के साथ जांच के कराने के लिए गई तो आशा द्वारा उस महिला मरीज को बरगला कर डॉक्टर मैडम के लिखे पर्ची के अनुसार एक जांच तो करा दिया। लेकिन जो महिला चिकित्सक द्वारा उस महिला की जांच कराने के लिए नहीं लिखा गया था। उसके अलावा उस आशा द्वारा एएनएम के कहने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बगल में चल रहे प्राइवेट जांच केंद्र पर जाकर महिला मरीज का टायफाईड,मलेरियाबकी जांच करा दी गयी। 

महिला मरीज को उस जांच के लिए 400 रुपये का भुगतान भी करना पड़ा। जब महिला मरीज जांच कराकर रिपोर्ट लेकर डॉक्टर मैडम के पास पहुंची और रिपोर्ट दिखाई तो रिपोर्ट देखकर डॉक्टर मैडम हैरान हो गई। डॉक्टर मैडम ने उस महिला से कहा कि यह क्या जांच करायी हो। सारी बात उस महिला मरीज ने डॉक्टर मैडम को बताया। डॉक्टर मैडम को सारी बातें समझ में आ गयी। क्या होता है।उक्त महिला मरीज भगवानपुर थाना क्षेत्र के सरैया गांव की बताई जाती है। 

महिला मरीज ने आरोप लगाते हुए बताया कि उसे डॉक्टर मैडम द्वारा प्रेग्नेंसी जांच कराने के लिए बस लिखा गया था। लेकिन आशा द्वारा उसे ले जाकर प्राइवेट जांच केंद्र पर टाइफाइड, मलेरिया का जांच करा दिया गया है। इसके लिए उसका 400 रुपये भी लगा। जो डॉक्टर मैडम के दिखाने पर उस जांच की कोई जरूरत नहीं था। मरीज को बातों से स्पष्ट पता चलता है कि सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली आशा व एएनएम द्वारा किस प्रकार आने वाले मरीजों को जांच कराने के नाम पर कमीशन का खेल चल रहा है। 

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सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जांच केंद्र वाले  डॉक्टर के लिखे पर्ची पर जो जांच नहीं करना है। उसका कैसे मरीज की टाइफाइड और मलेरिया की जांच कर दी जाती है। वही सवाल यह भी उठता है कि जब किसी मरीज के पर्ची पर टाइफाइड, मलेरिया या किसी प्रकार का कोई जांच नहीं लिखा जाता है तो आशा,एएनएम द्वारा उस महिला मरीज का टायफाइड, मलेरिया की जांच क्यों कराई गई। उसका 400 रुपये क्यों बर्बाद किया गया। ऐसे कितने मरीजों से प्रतिदिन किया जाता होगा।  वही जब आशा से इस बारे में सवाल पूछा गया तो उसने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया गया। 

सूत्रों के अनुसार बताया जाता है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को आशा व एएनएम द्वारा मरीजों को बरगला कर जांच कराने के नाम पर कमीशन का खेल खूब चलता है। लेकिन मरीज को समझ में नहीं आता है और ऐसे में वह आशा व एएनएम के चक्कर में पड़कर जैसे कहती हैं उसके उनसे जांच करा लेते हैं। जब डॉक्टर उनकी रिपोर्ट को देखते हैं। तब उन्हें पता चलता है लेकिन इसके बावजूद भी कुछ नहीं शिकायत करते है।फिर उन्हें कोई जानकारी नहीं आशा व एएनएम द्वारा दिया जायेगा। सूत्रों द्वारा यह बताया जाता है कि जब कोई आशा या एएनएम किसी मरीज को लेकर उस जांच केंद्र पर जांच कराने के लिए जाती है। उनका कमीशन बन जाता है। वह कमीशन मरीजों से ज्यादा पैसे वसूल कर दिया जाता है। जो जांच नहीं लिखा होता है डॉक्टरों द्वारा उसे भी कमिशन के चक्कर में करा दिया जाता है। ताकि उन्हें कमीशन बन जाये।

बोले प्रभारी 

इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ तेगबहादुर सिंह ने बताया कि उन्हें इस प्रकार का कोई शिकायत या लिखित नहीं मिला है। अगर ऐसा गलत काम हो रहा है। मरीज द्वारा लिखित आवेदन दिया जाए। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनपर कार्रवाई के लिए विभाग को लिखा जाएगा। वही उन्होंने भी कहा कि कभी कभी मरीजों से आशा द्वारा बाहर का दवा भी खरीदवा दिया जाता है। जो जरूरत नहीं होता है। हालांकि जो काम किया जा रहा है।वह पूरी तरह से गलत है। 

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