भोपाल. इंडिया डेटलाइन. दुनिया के एक लाख श्रेष्ठ जैव वैज्ञानिकों में मध्यप्रदेश के एक दर्जन विद्वान शामिल किए गए हैं। इनमें सागर के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के दो फ़ार्मेसी प्राध्यापक सम्मिलित हैं। इनके अलावा, मप्र के विश्वविद्यालयों में देवी अहिल्या विवि से दो प्राध्यापकों को स्थान मिला। शोध के मामले में झंडा गाड़ने वाले अन्य प्राध्यापकों में आइसर भोपाल के तीन, मैनिट के तीन, इंदौर आईआईटी के दो व्यक्ति शामिल हैं। 

दुनिया भर में अध्ययन-अध्यापन व शोध-अनुसंधान के मामले में प्रख्यात अमेरिका की स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ने दुनिया भर के श्रेष्ठ दो प्रतिशत वैज्ञानिकों का सर्वे कर सूची जारी की है। PLoS biology में प्रकाशित एक लाख प्रतिभाओं की सूची में भारत के 1491 जैव वैज्ञानिक सम्मिलित किए गए हैं। इनका चयन इनके शोध कार्य के उपयोग करने के आधार पर किया गया यानी उनके शोधपत्रों को कितना रेफर किया गया। स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन पी लोनायडिस के नेतृत्व में आँकड़े एकत्र कर यह अध्ययन किया गया। 

सूची में सागर के डॉ. हरीसिंह गौर विवि के दो भेषज (फ़ार्मेसी) वैज्ञानिक सुरेश पी व्यास व संजय जैन को चुना गया है। दोनों वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। डॉ. सुरेश व्यास कार्यवाहक कुलपति रह चुके हैं और डॉ. संजय जैन को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के हाथों सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा इसी विभाग में काम कर चुके एन के जैन को सेवानिवृत्त होने के बाद भी सूची में शामिल किया गया।

 फ़ार्मेसी के वरिष्ठ प्राध्यापक व स्थानीय फ़ार्मेसी कॉलेज में प्राचार्य डॉ. अशोक जैन के अनुसार सूची में ऐसे अन्य कुछ नाम भी हैं जो सागर के फ़ार्मेसी विभाग से निकलकर देश के अन्य संस्थानों में काम कर रहे हैं। वे  चंडीगढ़ में कार्यरत संयोग जैन व बड़ौदा में काम कर चुके अंबिका नंदन मिश्रा का नाम बताते हैं। यह पूछने पर कि सागर विवि में केवल फ़ार्मेसी ही श्रेष्ठ वैज्ञानिक क्यों दे रहा है? डॉ. अशोक जैन का कहना है कि यह विभाग विवि के ऐसे पुराने विभागों में शामिल है जो निरंतर एक ही गति से काम कर रहा है जबकि कई विभागों के अध्ययन-अध्यापन में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। शोध में परिश्रम और इसके आधार पर स्तरीयता सुनिश्चित करना यहाँ की स्थापित परंपरा है। देश के श्रेष्ठ फ़ार्मेसी संस्थानों में यह विभाग शामिल रहा है। जब मप्र में फ़ार्मेसी के अध्ययन की समुचित व्यवस्था नहीं थी, तब यहाँ फ़ार्मेसी में स्नातकोत्तर की शिक्षा व शोध की सुविधा थी। यहाँ के छात्रों ने दुनिया भर के भैषजिक संस्थानों में स्थान पाया। 

मध्यप्रदेश के जिन अन्य विद्वानों को सूची में शामिल किया गया, उनमें भारतीय विज्ञान शिक्षण व अनुसंधान संस्थान (आयसर) भोपाल से कंकन भट्टाचार्य,नितिन टी पाटिल व दीपक चोपड़ा, मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) भोपाल के आलोक मित्तल, ओपी मोदी व शैलेन्द्र जैन, देवी अहिल्या विवि इंदौर के दिनेश वार्ष्णेय व कृष्णा के पांडे, आइआइटी इंदौर के हरि बी हबलानी व एससी कोरिया हैं। 

अगर हम केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों पर गौर करें तो सूची में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के 12 वैज्ञानिकों ने स्थान पाया जिनमें सभी विधाओं के विद्वान शामिल हैं। जितने अकेले बीएचयू से चुने गए, उतने पूरे मध्यप्रदेश से, यह शोचनीय है। डॉ. अशोक जैन कहते हैं-’हमें उच्च शिक्षा संस्थाओं में शोध व अध्यापन की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। जब हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अपने को प्रस्तुत करते हैं तो केवल गुणवत्ता के आधार पर ही खड़े हो सकते हैं।’

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