19 शासकीय सेवकों पर ईओडब्ल्यु ने दर्ज की एफआईआर

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल। मध्यप्रदेश में 11 साल पहले हुए पौने चार करोड़ के एक घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, इसमें कॉलेज के प्रिंसिपल सहित 19 शासकीय सेवकों पर एफआईआर हुई है।
रीवा जिले के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में 3 करोड़ 79 लाख 64 हजार 844 रुपयों का घोटाला सामने आया है। इस पर ईओडब्ल्यु भोपाल ने 19 व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह घोटाला वर्ष 2009 में हुआ था। रीवा की ईओडब्ल्यु इकाई के निरीक्षक सज्जन सिंह परिहार की रिपोर्ट पर प्रकरण भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(1) डी तथा भादवि की धारा 409, 420 एवं 120 बी के तहत दर्ज किया गया है।

ये बनाये गये हैं आरोपी :

तत्कालीन प्राचार्य रामलला शुक्ला, तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डा. एसयू खान, तत्कालीन प्राध्यापक डा. अजय शंकर पाण्डेय, तत्कालीन प्राध्यापक डा. कल्पना अग्रवाल, तत्कालीन प्राध्यापक डा. संजय सिंह, तत्कालीन प्राध्यापक डा. संजय शंकर मिश्रा, प्राध्यापक डा. आरपी चतुर्वेदी, तत्कालीन प्राध्यापक डा. बीपी सिंह, तत्कालीन प्राध्यापक डा. सुशील कुमार दुबे, तत्कालीन प्राध्यापक डा. अवध प्रताप शुक्ला, तत्कालीन प्राध्यापक डा. आरएन तिवारी, तत्कालीन प्राध्यापक डा. एसएन पाण्डेय, तत्कालीन प्राध्यापक डा. आरके धुर्वे, तत्कालीन प्राध्यापक डा. सत्येन्द्र शर्मा, तत्कालीन प्राध्यापक डा. एचडी गुप्ता, श्रमिक प्रियंका मिश्रा, श्रमिक प्रभात प्रजापति, भृत्य रामप्रकाश चतुर्वेदी तथा तत्कालीन लेखापाल रणमत कालेज रीवा।

कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में दोषी पाये गये थे :

कलेक्टर रीवा द्वारा इस मामले की एक जांच दल गठित कर जांच कराई गई थी जिसमें पाया गया था कि व्यापक अनियमितता कर नियम विरुध्द भुगतान किये गये। मानदेय, यात्रा भत्ता, छेलीफोकन भत्ता, पारिश्रमिक आदि के भुगतान में यह घोटाला किया गया तथा नियमित वेत-भत्तों के अलावा यह भुगतान किया गया। एफआईआर में टिप्पणी की गई है कि मानदेय/पारिश्रमिक कालेज में कार्यरत प्राचार्यों एवं कुछ प्राध्यापकों के लिये लाभ का स्रोत बन गये थे तथा वे लगातार लाभान्वित भी होते रहे। साथ ही गोपनीय बंद लिफाफों के माध्यम से न केवल प्रश्न-पत्र मुद्रण की गोपनीयता की आड़ में वित्तीय भ्रष्टाचार किया गया बल्कि जनभागीदारी निधि की राशि का बड़ी मात्रा में गबन किया गया।

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