वेद माथुर
(पूर्व महाप्रबंधक
पंजाब नेशनल बैंक)

नशा दौलत का हो या शोहरत का, चूर कर देता है।
और नशा अगर गांजे का हो,तो मशहूर कर देता है।
– छेद ‘अजमेरी’

अपने मोटापे को लेकर मजाक करके ही सही, पूरे देश को हंसाने वाली भारती सिंह को कुछ दिन रोना पड़ेगा। उन्हें और उनके पति को गांजे का प्रयोग करने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गिरफ्तार कर लिया है।हालांकि उनके पिछले दो साल के इनकम टैक्स रिटर्न बताते हैं कि उन्होंने इन दो सालों में 25 करोड़ ₹ कमाए हैं लेकिन फिर भी वे दीपिका पादुकोण की तुलना में बहुत छोटी कलाकार हैं इसलिए हमारे कानून ने दीपिका पादुकोण को इज्जत से जाने दिया जबकि भारती सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
हमारे देश में कानून हर आदमी के लिए अलग है। यदि पुलिस वाला किसी गरीब व्यक्ति का चालान करता है तो चालान के साथ-साथ उसे गाली भी देता है, एक आम आदमी का सिर्फ चालान होता है, किसी छोटे नेता के बेटे का बिना चालान किए उसे जाने दिया जाता है, किसी बड़े अफसर या बड़े नेता को ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते समय पकड़े जाने पर चालान तो किया नहीं जाता वरन सैल्यूट भी मारा जाता है, जबकि सेलिब्रिटी को पकड़ने पर पुलिस वाले मुस्कुरा कर अभिवादन करते हैं और फिर सेल्फी लेकर ससम्मान जाने देते हैं।( इस सेल्फी को पुलिस वाला बाद में अपनी डीपी बना लेता है। ) लेकिन अचानक सरकार में बैठे कुछ लोगों की नीयत में ‘खोट’ आ गई और वह परंपरा के विपरीत फिल्मी हस्तियों को परेशान कर रही है!

साभार


हमारे देश में सरकार की एप्रोच अव्यवहारिक है ।पाकिस्तान में यदि कोई आदमी कत्ल कर देता है तो वह पीड़ित परिवार को मुआवजा देकर उनसे लिखवा लेता है कि उन्होंने उसे माफ कर दिया है। इस पत्र के आधार पर उसे कोर्ट भी माफ कर देता है। इससे कोर्ट का समय बचता है और सभी संबंधित पक्ष संतुष्ट हो जाते हैं।
हमारे देश में भी सरकार को प्रतिबंधित नशीली दवाइयों के उपयोग के आरोप में फंसी दीपिका पादुकोण, साराअली खान, रकुल प्रीत सिंह, रिया चक्रवर्ती आदि को 5 से 10 करोड़ रु का जुर्माना लेकर छोड़ देना चाहिए। जुर्माने की यह रकम या इससे भी अधिक फिल्मी लोग आसानी से दे देंगे।
इस राशि से सरकार इन्हीं फिल्मी सितारों के नाम पर अलग-अलग जगह नशा मुक्ति केंद्र खोल सकती हैं जैसे मुंबई में ‘दीपिका पादुकोन नशा मुक्ति केंद्र’, भोपाल में ‘सारा और सैफ अली खान नशा मुक्ति केंद्र’ आदि।
राजस्थान में हिरण के शिकार के मामले में सलमान खान और कुछ फिल्मी अभिनेता- अभिनेत्रियों पर मुकदमा चल रहा है। इस तरह के मुकदमों में अंत में कुछ भी नहीं होने वाला है लेकिन सेलिब्रिटीज को अनावश्यक परेशान किया जाता है और कोर्ट में महत्वपूर्ण मुद्दों को निपटाने की बजाय इन पर समय खराब हो रहा है ।
व्यवहारिक यह है कि इन सभी सितारों से 10 से 20 करोड़ रुपए लेकर राजस्थान में काले हिरण के प्रजनन एवं अनुसंधान के लिए एक केंद्र खोल दिया जाए तथा साथ ही उनके लिए सलमान के नाम पर कुछ अभ्यारण बना दिए जाए।
सलमान खान पर फुटपाथ पर सोने वाले कुछ लोगों पर कार चढ़ा कर उन्हें मारने का भी आरोप है। इन सभी लोगों को मुआवजे के रूप में सलमान से एक आवास और दो चार करोड़ रुपए की फिक्स डिपाजिट दिलवाई जाती तो सलमान खान खुशी-खुशी दे देते। इसके बाद सलमान पर किए गए जुर्माने की राशि से सरकार रात को फुटपाथ पर सोने वालों को नियमित रूप से ‘वाटर कैनन’ के द्वारा पानी फेंककर जगा कर भगा सकती थी ताकि भविष्य में फिर कभी सलमान खान या किसी फिल्मी सितारे की कार फुटपाथ पर चढ़े तो कोई नहीं मरे।
मुंबई में आए दिन फिल्म स्टारों के घर पर देर रात तक पार्टियां चलने पर पुलिस इन्हें बंद करवाने का असफल प्रयास करती रहती है ।इसके बजाय इन्हें करोड़ों रुपए लेकर रात भर पार्टी करने का लाइसेंस दे दिया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है। ज्यादातर फिल्मी सितारे बिना नशीली दवाइयों के फुल एनर्जी के साथ डांस और नकली मारपीट नहीं कर सकते इसलिए इन्हें भारी फीस लेकर सरकार नशीली दवाइयां के उपयोग का लाइसेंस दे सकती है, जैसे कि गुजरात में नशाबंदी के बावजूद सशुल्क शराब पीने का परमिट मिलता है।
साथ ही फिल्मी सितारों को ड्रग्स पार्टी करने के लाइसेंस देने चाहिए।
फिल्मी हस्तियों के शादी व तलाक के लिए अलग पर्सनल लॉ की भी जरूरत है।
फिल्म स्टारों को आम आदमी की तरह ट्रीट करना इन सुपरमैन और सुपर विमेन के साथ घोर अन्याय है।
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दीपिका पादुकोण से लेकर सारा अली खान और सलमान खान से लेकर रकुलप्रीत सिंह तक सेलेब्रिटी होने के नशे में कानून तोड़ बैठे और न्यूज़ चैनलों की खुराक बनकर पछता रहे हैं। इन्हें पछताने की या कानून तोड़ने अथवा अपना लाइफ स्टाइल बदलने की जरूरत नहीं है बल्कि इनके संगठन को करण जोहर के नेतृत्व में सरकार से मांग करानी चाहिए कि वे उन्हें फीस लेकर गैरकानूनी गतिविधियां करने की अनुमति का लाइसेंस जारी कर दें। मुझे विश्वास है कि आज नहीं तो कल सरकार यही करेगी।

चलते-चलते:
ड्रग्स चैट पर दीपिका पादुकोण की दलील,
“डींग हांकने के लिए लिखी चैट में माल की बात, हम शेखी बघार रहे थे…मज़ाक के चक्कर में अब फंस गए। मैं खिलाड़ी हूं, रोज़ जिम जाती हूं, ड्रग्स नहीं ले सकती। माल का मतलब सिगरेट है!मैंने अपने नौकर रामू के लिए मंगवाई थी। हमने हशीश और गांजा तो दूर की बात, कभी बीड़ी- सिगरेट तक नहीं पी।”


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