वेद माथुर 

कांग्रेस की स्थिति इस समय रेलवे के यार्ड में खड़ी उस रेलगाड़ी जैसी है जो उचित इंजन और यात्रा की मांग के अभाव में खड़ी-खड़ी जंग खा रही है।

 कांग्रेस में अहमद पटेल, सलमान खुर्शीद व गुलाम नबी आजाद से लेकर पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल जैसे ढेर सारे नेता हैं, जो जमीन से जुड़े हुए नहीं हैं तथा दूसरी ओर दिग्विजय सिंह से लेकर अधीर रंजन चौधरी तक बहुत सारे खुद की टीम पर ही गोल करने वाले खिलाड़ी भी मौजूद हैं। 

कांग्रेस में अहमद पटेल जैसे ढेर सारे नेता ऐसे हैं जो पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते लेकिन पार्टी की कमान उनके हाथ में रहती है।

हाल ही में गुलाम नबी आजाद ने एक इंटरव्यू में कहा है कि कांग्रेस के नेता पांच सितारा होटल में रुकते हैं तथा वे कार्यकर्ताओं से नहीं जुड़े हुए हैं। हकीकत यह है कि गुलाम नबी आजाद के नाम पर कांग्रेस को 25- 50 वोट नहीं मिल सकते तथा तथा वे खुद शायद ही कभी पांच सितारा होटल से नीचे के होटल में रुके हों।

उनके बयानों से लगता है कि वे अभी से राज्यसभा में नहीं जा सकने की आशंका के मद्देनजर भयंकर कुंठा का शिकार हो गए हैं। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे दर्जनों नेता भी इसी हताशा और कुंठा के शिकार हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी तय है लेकिन दरअसल एक मजबूत विपक्ष और कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए कांग्रेस को एक ऐसे अध्यक्ष की जरूरत है जिसमें मेरे विचार से निम्नलिखित विशेषताएं हों-1.उसका मौलिक चिन्तन हो। 2. टीम भावना से खेलना जानता हो। 3. जनमानस से संवाद करना कनेक्ट होना जानता हो। 4. जीतने की जिद हो। 5. जिसमें सत्ता छिनने की कुंठा न हो। 6.जो जमीनी हकीकत जानता हो। 7. हर मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना के बजाए, जिसके पास रचनात्मक कार्य योजना और सुझाव हों। 8. जिसमें यह समझ हो कि उसे सिर्फ काश्मीर में नहीं, पूरे हिंदुस्तान में चुनाव लड़ना है। 9. वह स्वर्गीय राजेश पायलट की तरह सामाजिक और व्यवहार कुशल हो। 10.वह संजय गांधी की तरह द्रुत गति से निर्णय लेने में सक्षम हो तथा अपने निर्णय को क्रियान्वित कराने के लिए उसमें आवश्यक गट्स हों। 11. उसमें स्वर्गीय माधवराव राव सिंधिया जैसी प्रशासनिक सूझबूझ और कुशलता हो। 12. वह कठोर परिश्रम करने वाला फुल टाइम राजनीतिज्ञ हो। 13. वह छद्म धर्मनिरपेक्ष होने के बजाय वाकई धर्मनिरपेक्ष हो और सत्ता के लिए शिवसेना जैसी पार्टियों से समझौते के बजाय अपने सिद्धांतों पर चले।

कांग्रेस और विपक्ष का मजबूत होना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है और कांग्रेस को तत्काल ऐसे नेता की जरूरत है जो उसकी बिगड़ी दशा सुधारे और उसे दिशा दे सके। वक्त का तक़ाज़ा है कि कांग्रेस कार्यकर्ता अध्यक्ष के जल्दी आने वाले चुनाव में कम से कम उक्त में से ज्यादा से ज्यादा गुण वाला नेता चुनने की कोशिश करें। सलाह हमारी, मानना न मानना आपकी मर्ज़ी। 

(लेखक व्यंग्य उपन्यास ‘बैंक ऑफ़ पोलमपुर’ के लेखक हैं।) 

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