डॉ. नवीन जोशी/ भोपाल

श्रमिकों एवं कर्मचारियों के आंदोलनों पर लगाई रोक

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने औद्योगिक संस्थापनाओं एवं कार्यालयों के लिये 32 बिन्दुओं पर नई कोविड गाईडलाईन जारी की है। इसमें कहा गया है कि कर्मचारी विवाह, जन्मदिन आदि जैसे बड़े सामाजिक समारोहों में जाने से बचें। दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ वीडियो कान्फ्रेन्स या टेलीफोन कॉल पर बातचीत करें। यदि एकदम ही आवश्यक हो तो मास्क पहनें और हर समय सामाजिक दूरी बनाये रखें। जिनता संभव हो उतना बाहर कम समय बितायें।
ये भी जारी हुई गाईडलाईन :
श्रमिकों/कर्मचारियों द्वारा अनावश्यक रुप से किये जाने वाले आंदोलनों को रोकें। कोविड लक्षण वाले कर्मचारियों को बिना लक्षणों वाले कर्मचारियों केि साथ कार्य करने की अनुमति न दें तथा उन्हें घर जाकर तुरंत निकटतम शासकीय अस्पताल में परमर्श लेने हेतु निर्देशित करें। कर्मचारियों को अनावश्यक सतहों को छूने से रोकें। कर्मचारियों को उपयोग में आने वाले उपकरणों को साझा करने से रोकें। आम क्षेत्रों में श्रमिकों/कर्मचारियों को भीड़ एकत्रित करने की अनुमति न दें। बैठकों से बचे तथा मीटिंग के लिये वर्चअल प्लेटफार्म का उपयोग करें। जितना संभव हो एयर कंडीशनिंग का उपयोग न करें। कर्मचारियों को खराब हवादार कमरों में काम करने की अनुमति न दें। अनावश्यक यात्रा से बचें। यदि संभव हो तो कैफेटेरिया सेवा बंद कर दें। श्रमिकों को एक साथ भोजन आदि करने की अनुमति न दें। खांसते या छींकते समय अपने चेहरे को पूर्ण रुप से ढकें और खुले हाथों पर छींके या खांसे नहीं। मास्क पहने और सामाजिक दूरी बनाये रखें। सार्वजनिक परिवहन से बचें, पैदल चलें या साइकिल का उपयोग करें, यह आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है। भीड़-भाड़ वाले स्ािानों जैसे मॉल, रेस्ओरेंट, जिम, धार्मिक स्थान और खेल प्रतियोगिता आदि में जाने से बचें। आवश्यक हो तो ही किसी से मिलने उनके घर जायें अन्यथा स्थगित कर दें। अपने प्रियजनों से न हाथ मिलायें, न ही गले लगायें। मोबाईल फोन एवं अन्य उपकरण साझा न करें। आम जनता द्वारा अधिक से अधिक उपयोग की जाने वाली सतह जैसे सीढ़ी, रेलिंग, दरवाजे के हैंडल और नॉब्स, गेट, लाईअ स्विच, काउण्टर टॉप, नल आदि को न छुयें, दरवाजा खोलने के लिये अपनी कोहनी या हाथ का उपयोग करें।

बुन्देलखण्ड पैकेज में घोटाला करने पर दोषी
पाये गये 12 अफसरों पर अब कार्यवाही होगी

भोपाल। बुन्देलखण्ड पैकेज के क्रियान्वयन में घोटाला करने पर दोषी पाये गये जल संसाधन विभाग के 12 अफसरों पर अब कार्यवाही की जायेगी। इनमें छह अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन सभी 12 अफसरों को राज्य शासन ने नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिये पन्द्रह दिन का समय दिया है तथा पक्ष न रखने पर एकपक्षीय कार्यवाही करने की चेतावनी दी है।
ये अधिकारी दोषी पाये गये :
तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एचडी कुम्हार, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री दीपक सतपुते, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एके त्रिपाठी, तत्कालीन उपयंत्री एमसी आर्या, तत्कालीन उपयंत्री एससी माहौर, तत्कालीन उपयंत्री एमएस पवैया, सेवानिवृत्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी जेआर कनेरिया, सेवानिवृत्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी आरपी शर्मा, सेवानिवृत्त तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एमएल जैन, सेवानिवृत्त तत्कालीन उपयंत्री एमएल गुप्ता, सेवानिवृत्त तत्कालीन उपयंत्री पीके अमर तथा सेवानिवृत्त तत्कालीन उपयंत्री एमके चौबे।
तकनीकी परीक्षक की जांच में पाये गये दोषी :
पवन घुवारा की रिट पिटिशन पर मुख्य तकनीकी परीक्षक सतर्कता द्वारा राजघाट नहर परियोजना दतिया के अंतर्गत निर्माण कार्यों में अनियमितता के लिये उत्तरदायी पाये गये उक्त अफसरों के खिलाफ हुई विभागीय जांच प्रकरण में अपना जो जांच प्रतिवेदन दिया है उसमें ये सभी दोषी पाये गये हैं। दो अफसरों तत्कालीन अनुविभागीय एसपी पटैरिया एवं तत्कालीन उपयंत्री एके श्रीवास्तव को दोषी नहीं पाया गया है। शेष दोषी 12 अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने नियमित पर्यवेक्षण नहीं किया जिसके कारण गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुये थे।

भू-अर्जन के मामलों में अपील
न करने पर बिफरे एसीएस मिश्रा

भोपाल। भू-अर्जन के मामलों में हाईकोर्ट में अपील न करने के मामलों में जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव एसएन मिश्रा बिफर गये हैं। उन्होंने नोटशीट भेजकर ऐसे सभी मामले तलब कर लिये हैं।
जल संसाधन विभाग के ईएनसी को भेजी नोटशीट में एसीएस मिश्रा ने तल्ख लहजे में कहा है कि जल संसाधन विभाग की परियोजनाओं हेतु भू-अर्जन के रिफरेंस प्रकरणों में जो आदेश जिला न्यायालयों द्वारा पारित किये जा रहे हैं एवं जिनमें शासकीय अभिभाषक के अभिमत अनुसार उच्च न्यायालय में अपील की जाना है, उनमें अनुमति हेतु जो प्रकरण शासन को प्रेषित किये जा रहे हैं, उनमें अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा अत्यधिक विलम्ब किया जा रहा है जोकि आपत्तिजनक है। इसलिये विभागाध्यक्ष कार्यालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देशित किया जाता है कि जिन भू-अर्जन प्रकरणों में उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाना है, उन्हें निर्धारित समयावधि के भीतर शासन को भेजा जाये।
एसीएस की उक्त नोटशीट मिलते ही ईएनसी ने सभी मैदानी अधिकारियों को ताकीद कर दिया है कि वे तुरन्त इस पर कार्यवाही करें।

राज्य वन्य प्राणी बोर्ड का पुनर्गठन एवं स्टीयरिंग कमेटी का गठन
भोपाल।प्रदेश की शिवराज सरकार ने राज्य वन्य प्राणी बोर्ड का पुनर्गठन किया है वहीं राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया है।
राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के अध्यक्ष सीएम एवं वन मंत्री उपाध्यक्ष बनाये गये हैं जबकि मुख्य सचिव एवं वन, अजाजजा कल्याण, पर्यटन विभागों के एसीएस/पीएस सदस्य बनाये गये हैं। तीन विधायक नागेन्द्र सिंह गूढ़, संजय शाह एवं राम दांगोर भी सदस्य बनाये गये हैं। पत्रकार सुरेन्द्र तिवारी, अभिलाष खाण्डेकर, रिटायर्ड आईएफएस एचएस पाबला, जंगल लॉज के अध्यक्ष एरिक डी कुन्हा, वन्य प्राणी विशेषज्ञ मंधार महाजन, रवि अरोरा, मनमोहन सिंह, खगेश्वर नायक एवं एनएस डुगरियाल भी सदस्य बनाये गये हैं।
राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी बाघों, सह परभक्षियों एवं भक्ष्य पशुओं की सुरक्षा, प्रबंधन एवं संवर्धन की गतिजविधियों एवं अनुश्रवण करने के लिये बनाई गई है। इसके भी अध्यक्ष सीएम एवं उपाध्यक्ष वन मंत्री बनाये गये हैं जबकि पांच शासकीय सदस्य क्रमश: सीएस, वन एवं अजाजजा विभाग के एसीएस/पीएस, क्षेत्र संचालक कान्हा टाईगर रिजर्व उमरिया, क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व भी सदस्य बनाये गये हैं। तीन वन्य प्राणी विशेषज्ञ अनीश अंधेरिया, हेमेन्द्र कोठारी व मुकेश इंगले को भी सदस्य नियुक्त किया गया है

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