राकेश अचल

कांग्रेस शासनकाल के माफिया भाजपा शासन में समाजसेवी बन गए हैं और कांग्रेस शासन में जो समाजसेवी थे वे अब सरकार की नजरों में माफियां हैं। हकीकत यह है कि माफिया तो माफिया हैं। सरकार बदलने से उनके काम में कोई ज्यादा अन्तर नहीं पड़ता। 

लगता है कि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को क़ानून और व्यवस्था सुधारने के लिए डॉन की भाषा बोलने का कोई ख़ास प्रशिक्षण दिया गया है। उप्र के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के बाद अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी डॉन की भाषा बोलने लगे हैं। उन्होंने असामाजिक तत्वों को चेतावनी दी है कि वे मध्यप्रदेश छोड़ जाएँ अन्यथा वह उन्हें दस फीट नीचे गाड़ देंगे। मुख्यमंत्री की इस चेतावनी से शायद सूबे में राम राज्य आ जाए। 

एनसीआरबी आंकड़े कहते हैं कि मध्यप्रदेश अपराधों के मामले में अपने पड़ोसियों के मुकाबले काफी आगे है। शायद इसीलिए मुख्यमंत्रीजी को डॉन की भाषा में बोलना पड़ा। होशंगाबाद जिले में किसानों की सभा में मुख्यमंत्रीजी ने किसानों को चेताया है या गुंडों को, भगवान जाने लेकिन वे बोले-‘आजकल अपन खतरनाक मूड में हैं, गड़बड़ करने वालों को छोड़ेंगे नहीं। पूरे फॉर्म में है मामा अभी। एक तरफ माफियाओं के खिलाफ अभियान चल रहा है। मसल पावर का, रसूख का इस्तेमाल करके कहीं अवैध कब्जा कर लिया। कहीं भवन बना दिया। कहीं ड्रग माफिया है। सुन लो रे ! मध्यप्रदेश छोड़ देना नहीं तो 10 फीट नीचे जमीन में गाड़ दूंगा। ‘

मुख्यमंत्री की चेतावनी में सच्चाई हो या न हो लेकिन इस बात से  कोई इंकार नहीं कर सकता कि भाजपा के पंद्रह साल के शासन में प्रदेश में बाहुबलियों की खूब बनी। कांग्रेस की डेढ़ साल की सरकार ने इन बाहुबलियों पर नजर टेढ़ी की तो इन सबने मिलकर कांग्रेस की सरकार को ही चलता कर दिया। अब सूबे में फिर से भाजपा की सरकार है इसलिए पुराने बाहुबली दोबारा सक्रिय हो गए हैं और वे पार्टी पर भी हावी दिखाई दे रहे हैं।  हाल ही में प्रदेश में हुए विधानसभा उपचुनावों में ग्वालियर-चंबल में भाजपा ने अपना चुनाव कार्यालय ही एक ऐसे होटल में बनाया था जो सरकारी नाले की जमीन पर बनाया गया है। कांग्रेस सरकार इस होटल को तोड़ने ही वाली थी कि खुद टूट गई। 

आंकड़े देने वाले नेशनल ब्यूरो की रपट कहती है कि दलित बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है।आंकड़े 2019 के हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार साल 2019 में मध्यप्रदेश में दलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 214 घटनाएं हुई हैं। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र में दलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 181 घटनाएं हुई हैं। तीसरे नंबर पर हरियाणा है। यहां दलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 101 घटनाएं हुई हैं। जबकि देशभर में दलित बच्चियों के साथ दुष्कर्म की कुल 1116 घटनाएं हुई हैं।

मध्यप्रदेश में अवैध उत्खनन और सरकारी जमीन हड़पने वाले अनेक संगठित गिरोह हैं।इनमें  जनप्रतिनिधि ही नहीं अपितु नौकरशाह भी भागीदार हैं लेकिन सरकार इनकी मुश्कें नहीं कस पा रहीं हैं। मध्यप्रदेश अब अवैध उत्खनन के मामले में देश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। इसकी तस्दीक केन्द्र सरकार के आंकड़ों ने की है लेकिन हैरानी इस बात की है कि इनमें एफआईआर महज़ कुछ फीसद मामलों में ही दर्ज हुई हैं।

 मध्यप्रदेश में राजगढ़, भिंड हो या छिंदवाड़ा; धरती का सीना चीरकर अवैध उत्खनन की तस्वीरें पूरे प्रदेश से आती रहती हैं। यही वजह है केंद्रीय खनन मंत्रालय ने लोकसभा में दिए गए जवाब में माना है कि मध्यप्रदेश अवैध खनन के मामले में नंबर दो पर है। आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में अवैध उत्खनन के सबसे ज्यादा 31173 मामले महाराष्ट्र से आए, लेकिन एफआईआर 794 में दर्ज हुई। मध्यप्रदेश से 13880 मामले आए, लेकिन एफआईआर दर्ज हुई 516 में, जबकि आंध्र प्रदेश से 9703 मामले आए एफआईआर हुई 3 में.यानी अधिकतर मामले तो दर्ज ही नहीं हो पाते इसलिए मुख्यमंत्री की नींद में खलल पड़ना स्वाभाविक है।आपको बता दें कि मध्यप्रदेश को वैध खनन से जहां 4500  करोड़ का सालाना राजस्व मिलता है वहीं अवैध उत्खनन से तीन गुना जाता माफिया की जेबों में चला जाता है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की आत्मा में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री की आत्मा का प्रवेश, प्रदेश के लिए सुखद होगा या नहीं, अभी नहीं कहा जा सकता। आने वाले दिनों में यदि सरकार माफिया के खिलाफ अपने अभियान को राजनीति से ऊपर उठकर  अंजाम दे तो शायद कोई नतीजे सामने आएं, क्योंकि अभी तो प्रतिपक्ष से जुड़े लोग ही सरकार के निशाने पर हैं।  कांग्रेस के शासनकाल में भी ठीक यही सब हुआ था। कांग्रेस शासनकाल के माफिया भाजपा शासन में समाजसेवी बन गए हैं और कांग्रेस शासन में जो समाजसेवी थे वे अब सरकार की नजरों में माफियां हैं। हकीकत यह है कि माफिया तो माफिया हैं। सरकार बदलने से उनके काम में कोई ज्यादा अंतर नहीं पड़ता। 

आगामी २८ दिसंबर से शुरू हो रहे प्रदेश विधानसभा के सत्र में कालेधन के इस्तेमाल के साथ ही माफियाराज पर भी हंगामा हो सकता है क्योंकि आज का सबसे गर्म मुद्दा यही है। (इंडिया डेटलाइन)

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