शुभ आगमन नव वर्ष का,संकल्पित,सम्पूर्ण,सकारात्मक !

बीते साल ने गम दिए लेकिन सिखाया कहीं ज्यादा। हमने सीखा कि हम बिना दिखावे के कितने आराम से रह सकते हैं|लॉकडाउन में लोगों की बड़ी गाड़ियाँ खडी रह गयीं,डिज़ाइनर कपडे अलमारियों में बंद रखे रह गए जिनको देख -देख कर हम अपने लाइफ के गोल सेट करते थे ।यह लिस्ट हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ती जाती थी बस फर्क सिर्फ इतना था कि लंका को जलाने के बजाय हमारा सुख,चैन,शांति,संतोष सब जल कर ख़ाक होता जाता था…….

महिमा वर्मा  

हर बार की तरह इस बार भी नव वर्ष के लिए नए ख्वाब,नई मंजिलें छूने की चाह,पिछले वर्ष अपने से पूरे न कर पाए वादों को पूरा करने की मन में चाहत । पूरा वर्ष कोरोना के जाल में फँस कर बीत गया ।ऐसा लग रहा है आगे बढ़ने के बजाय कितने पीछे चले गए । एक साल में ही दुनिया कितनी बदल गई|पीछे  मुड़ कर देखते हैं तो सम्पूर्ण विश्व के कठिनतम गुजरे वर्ष के कुछ रुलाने वाले,कुछ दिल को छू लेने वाले,कुछ मानवता को शर्मसार करने वाले,कुछ इंसानियत को देवत्व के निकट पहुंचाने वाले अनुभवों का कोलाज आँखों के सामने गुजरे साल की दास्तान कह जाता है|बीता साल बहुतेरे गम दे गया पर बहुत कुछ सिखा भी गया । हमने सीखा कि हम बिना दिखावे के कितने आराम से रह सकते हैं|लॉकडाउन में लोगों की बड़ी गाड़ियाँ खडी रह गयीं,डिज़ाइनर कपडे अलमारियों में बंद रखे रह गए जिनको देख -देख कर हम अपने लाइफ के गोल सेट करते थे ।यह लिस्ट हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ती जाती थी बस फर्क सिर्फ इतना था कि लंका को जलाने के बजाय हमारा सुख,चैन,शांति,संतोष सब जल कर ख़ाक होता जाता था ।कोरोना काल हमको सुपरफीशियल दिखावटी जीवन शैली की अनेकों परतों के नीचे दबे हुए मानवीय स्नेह संबंधों की कद्र करना सिखा गया । अब सबको दिलोजां से ये  कोशिश करनी होगी कि ये अपनत्व,भाईचारे,सेवा और सहयोग की भावना बरकरार रहे । मानवीय गुणों को बचाए रखना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है ।

बीता वर्ष सबको वास्तविकता के धरातल पर बहुत कुछ सिखा गया तो क्यों नहीं नव वर्ष में हम एक बीमारी से छुटकारा पाने की कोशिश करें ‘सवेरे आँख खोलते ही वर्चुअल वर्ल्ड में  प्रवेश करने की बीमारी ।’ आप जब सवेरे उठते हैं तो सबसे ताज़ादम होते हैं इस तरोताज़ा दिलोदिमाग को अच्छे सकारात्मक ख्यालों से भरिए,ताजी खुली हवा में सांस लीजिये ,योग ,ध्यान ,फिटनेस के लिए कुछ कर लीजिये ,दिन भर के कार्यकलाप प्लान कर लीजिये ,परिवार के साथ समय बिता लीजिये ,कुछ पढ़ लीजिये,कितना कुछ सार्थक है करने को फिर चाहे तो वर्चुअल वर्ल्ड से अपना नाता जोड़िये ।

खुशनुमा सुबह’ की सार्थकता

‘खुशनुमा सुबह’ इस शब्द की सार्थकता बने रहने दीजिये ,इस समय को अपने आत्म-चिंतन एवं अवलोकन के लिए उपयोग कीजिए ।मेरा कहने का यह ज़रा भी आशय नहीं है कि सोशल मीडिया का  बिलकुल ही उपयोग न करें ।किन्तु यदि आप अपनी आँख खोलते ही सोशल मीडिया पर धावा बोलते हैं तो चैतन्य होते ही आप वर्चुअल वर्ल्ड से अपना नाता जोड़ रहे हैं और वास्तविकता से नाता तोड़ रहे हैं ।

         इस वर्षारम्भ पर यह रिसोल्युशन  लें कि अब से अपने आस-पास नज़र आने वाले वास्तविक लोगों को और ध्यान से देखेंगे,नोटिस करेंगे,एकनॉलेज करेंगे ,रियेक्ट करेंगे । वर्चुअल वर्ल्ड के दोस्तों की सूचना,कहानियाँ,उपलब्धियाँ या सिर्फ उपस्थिति भर को हम एकनॉलेज करते हैं और तरह तरह की इमोजी एवं चाशनी में घुले कमेंट्स से नवाजते भी हैं ।फिर क्या बात है कि हम सचमुच दिन-रात हमारे संपर्क में आने वाले लोगों को देख ही नहीं पाते हैं कि वो हमारे जीवन का कितना अहम् हिस्सा हैं ।हममें से कितने लोग लिफ्टमैन की तरफ आँख उठा कर भी देखते हैं मुस्कुराने या धन्यवाद देने की बात तो दूर रही ।हमारा शहर इंदौर स्वच्छता में नम्बर वन है सवेरे यदि हम छः बजे भी कहीं निकले तो हमें सफाई वाले भैय्या और दीदी लोग अपने काम में जी-जान से जुटे दिख जाएंगे ।हम कितनों को एकनॉलेज करते हैं ।उनको एक बार नमस्ते दीदी,सड़क क्या चमक रही है बोल कर तो देखिये उनके चेहरे पर आयी मुस्कराहट को देखकर उनसे ज्यादा खुशी शायद आपको होगी ।मॉल से बहुत शॉपिंग कर ली है ट्राली में सामान रखने वाले को,दरवाज़ा खोलने वाले को इनको सबको देखिये, थोडा मुस्कुराइए  ये सब लोग अदृश्य नहीं हैं|इस साल अपने ड्राइवर,प्रेस वाले,मेड के बच्चों,बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड इन सबको एक नई नज़र से देखिए,महसूस करिए कि ये  सब अस्तित्वविहीन नहीं हैं ।असल में तो ये ही हमारे रोजमर्रा के जीवन को सहज और सरल बनाते हैं बजाए हमारे वर्चुअल वर्ल्ड के सो कॉल्ड फ्रेंड्स के ।और हम हैं कि अपने जीवन के बहुमूल्य क्षण उन्हीं के नाम किये जा रहे हैं ।

मानवीय गुणों की अहमियत वापस लाइए

इस साल के लिए बनाए गए कैरियर,फिटनेस इत्यादि से संबंधित गोल तो आप आंशिक या पूर्ण रूप से पूरे कर लेंगे पर इस साल मानवीय गुणों की जीवन में अहमियत को फिर से वापस लाइए ।आप लायेंगे तो नई पीढ़ी भी देखेगी और सीखेगी ।सहानुभूति,संवेदना,कृतज्ञता,आदर,श्रम की महत्ता जो वर्चुअल वर्ल्ड की भूल भुलैय्या में कहीं गुमते चले जा रहे हैं इन्हें वापस खोज कर लाइए ।देखिये ये समदृष्टि,समभाव आपके जीवन में भी सुकून की बयार लाएगी ।इस वर्ष कोशिश कीजिए और स्वयं इससे मिलने वाले अपूर्व आनंद को अनुभव कीजिए । इसी आशा के साथ कि  नव वर्ष आपके,हमारे, सबके जीवन का वास्तविक खुशियों ,संतृप्तियों एवं सफलताओं का सहर्ष अग्रसर एक सकारात्मक सफ़र हो ।

नव वर्ष हर्ष नव,जीवन उत्कर्ष नव !

नव उमंग नव तरंग,जीवन का नव प्रसंग !

नवल चाह नवल राह,जीवन का नव प्रवाह !

(हरिवंश राय बच्चन)

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1 COMMENT

  1. बड़े सहज सरल शब्दों में सटीक बात!???
    नव वर्ष ऐसे ही सर्वमंगलकारी, सहज, सरल हो!!?☺️

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