डॉ. नवीन जोशी

सभी 9 लोग छिंदवाड़ा के ही,पहली बार वेबसाइट पर आया विवरण

भोपाल।मप्र विधानसभा सचिवालय ने पहली बार नेता प्रतिपक्ष द्वारा अपनी स्वेच्छानुदान निधि से दी गई आर्थिक सहायता की जानकारी अपने आफिशियल वेबसाईट पर प्रदर्शित की है। वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ हैं। कमलनाथ द्वारा वर्ष 2020-21 में अपनी निधि से कुल नौ व्यक्तियों को 1 लाख 85 हजार रुपये दिये हैं। मजेदार बात यह है कि ये सभी नौ व्यक्ति नाथ के विधानसभा क्षेत्र के छिन्दवाड़ा जिले के हैं। सहायता प्राप्त व्यक्ति हैं : सौंसर तहसील के ग्राम जाम निवासी अशोक ठाकरे को चिकित्सा सहायता हेतु 30 हजार, ईस्ट जुन्नारदेव दातला निवासी सुश्री निलीमा रानी चौरसिया को चिकित्सा सहायता हेतु 40 हजार, वार्ड नं. 32 छोटीबाजार निवासी श्रीमती राजकुमारी शर्मा को चिकित्सा सहायता हेतु 20 हजार, जुन्नारदेव निवासी जितेन्द्र कुमार अग्रवाल को चिकित्सा सहायता हेतु 10 हजार, वार्ड 7 दातला रोड जामई निवासी घनश्याम बरकाने को चिकित्सा सहायता हेतु 10 हजार, वार्ड 17 डुगरिया तहसील जामई निवासी प्रदीप राठौर को आर्थिक सहायता हेतु 5 हजार, नजरपुर तहसील जामई निवासी श्रीमती अनिता पति विजय को आर्थिक सहायता हेतु 5 हजार, वार्ड 23 तिलक चौक निवासी श्रीमती ज्योति सरेठा को चिकित्सा सहायता हेतु 25 हजार तथा कुकड़ा जगत वार्ड 2 निवासी संदीप करोसिया को चिकित्सा सहायता हेतु 40 हजार रुपये प्रदान किये गये हैं।
प्रोटेम स्पीकर ने दिये 31 लाख रुपये :
मप्र विधानसभा की वेबसाईट पर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा द्वारा वर्ष 2020-21 में अपनी स्वेच्छानुदान निधि से 253 व्यक्तियों की दी आर्थिक एवं चिकित्सासहायता का भी विवरण डाला गया है। शर्मा ने कुल 31 लाख 30 हजार रुपये की सहायता राशि अपनी निधि से दी है।

बदले प्रावधान : अब पार्षद पद का चुनाव लडऩा सस्ता किया

शिवराज सरकार को अपना प्रावधान बदलना पड़ा है और अब पार्षद का चुनाव लडऩा सस्ता कर दिया है।
दरअसल गत 26 नवम्बर 2020 को सरकार ने त्रिस्तरीय नगरीय निकाय आम चुनावों के लिये प्रावधान किया था कि नगरपालिकओं के चुनाव में पार्षद पद हेतु नामांकन-पत्र के साथ 3 हजार रुपये के स्थान पर 5 हजार रुपये और नगर निगम के चुनावों में पार्षद हेतु 5 हजार रुपये के स्थान पर 10 हजार रुपये जमानत राशि जमा कराना होगी। इससे इन दोनों नगरीय निकायों में चुनाव लडऩा मंहगा हो गया था।
लेकिन अब शिवराज सरकार ने यह प्रावधान बदल दिया और नगर पालिका में पुन: 3 हजार रुपये एवं नगर निगम चुनावों में 5 हजार रुपये पार्षद पद के चुनाव में नामांकन-पत्र के साथ जमानत राशि देने का उपबंध कर दिया। इससे इन दोनों निकायों में चुनाव लडऩा सस्ता कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के आम चुनावों में भी यही क्रमश: 3 हजार एवं 5 हजार रुपये का प्रावधान था।
राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग कीर सहमति से नगर परिषदों में पार्षद के चुनाव हेतु जमानत राशि पूर्वव1 1 हजार रुपये ही रखी है। नगर निगम मेयर हेतु 20 हजार रुपये तथा नगर पालिका अध्यक्ष हेतु 15 हजार रुपये एवं नगर परिषद अध्यक्ष पद हेतु 10 हजार रुपये जमानत राशि भी पूर्ववत रखी गई है।

आदिवासियों पर दर्ज आपराधिक
मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरु

प्रदेश के आदिवासियों पर दर्ज आपराधिक प्रकरणों को वापस लेने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत 19 सितम्बर को भोपाल जिले में आयोजित वन अधिकार पत्र वितरण कार्यक्रम में घोषणा की थी कि आदिवासी वर्ग के विरुध्द दर्ज छोटे-मोटे आपराधिक मामले वापस लिये जायेंगे।इस घोषणा का क्रियान्वयन करने के लिये मुख्यमंत्री सचिवालय ने 25 सितम्बर को एक नोटशीट गृह विभाग को भेजी। गृह विभाग ने 25 नवम्बर को संचालक लोक अभियोजन को निर्देश भेजकर कहा कि वे इस घोषणा पर आवश्यक कार्यवाही करें।अब संचालक लोक अभियोजन विजय यादव ने सभी जिला अभियोजन अधिकारियों को निर्देश भेजकर कहा है कि वे सीएम की घोषणा के तारतम्य में आदिवासियों पर दर्ज छोटे-मोटे प्रकरणों की वापसी हेतु आवश्यक कार्यवाही कर अवगत करायें।

आदिमजाति मंत्रण परिषद का पुनर्गठन

राज्य सरकार ने आदिमजाति मंत्रण परिषद का पुनर्गठन किया है। पिछली समिति 4 सितम्बर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में बनी थी और अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बनी है।पुनर्गठित समिति में आदिमजाति कल्याण मंत्री मीना सिंह उपाध्यक्ष बनी हैं जबकि सदस्यों में पन्द्रह विधायक यथा सीताराम, अमर सिंह, कुंवर सिंह टेकाम, शरद जुगलाल कौल, जयसिंह मरावी, श्रीमती मनीषा सिंह, शिवनाराण सिंह, श्रीमती नंदनी मरावी, देव सिंह सैय्याम, संजय शाह, पहाड़ सिंह, वन मंत्री विजय शाह, राम दांगोरे, प्रेम सिंह पटेल एवं दिलीप कुमार मकवाना शामिल हैं। जबलपुर के पैथालाजिस्ट डा. रुप नारायण मंडावी, धार के सामाजिक कार्यकत्र्ता कालू सिंह मुजाल्दा तथा राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी सदस्य बनाये गये हैं। पुनर्गठित समिति का कार्यकाल तीन वर्ष रखा गया है तथा प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण समिति के सदस्य सचिव नियुक्त किये गये हैं।

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