डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।प्रदेश में निर्माण कार्यों की लागत का एक प्रतिशत के बराबर उपकर वसूलकर मप्र श्रम भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में जमा कराया जाता है। वर्ष 2020-21 में इसकी वसूली का लक्ष्य 401 करोड़ रुपये रखा गया था परन्तु कोरोना संक्रमण से लगे लॉकडाऊन के कारण लक्ष्य में सौ करोड़ रुपयों की कमी कर दी गई, परन्तु इसके बावजूद 52 में से 49 जिले अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में पिछड़ गये हैं। 
लक्ष्य के अनुरुप प्रथम तिमाही में दस प्रतिशत, द्वितीय तिमाही में 40 प्रतिशत, तृतीय तिमाही में 70 प्रतिशत तथा चतुर्थ तिमाही में सौ प्रतिशत वसमली का लक्ष्य रखा गया था। परन्तु 30 नवम्बर 2020 तक 300 करोड़ रुपये में से मात्र 933 करोड़ रुपये ही वसूल किये जा सके हैं। इस पर राज्य के श्रमायुक्त ने सभी श्रम अधिकारियों एवं निरीक्षकों को कड़ी हिदायत दी है कि 31 मार्च 2021 तक उपकर की शतप्रतिशत वसूली करें अन्यथा संबंधित अधिकारी के विरुध्द अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
उपकर की वसूली की यह है स्थिति :
एक, नवम्बर 2020 तक तीन जिलों राजगढ़, खण्डवा एवं खरगौन द्वारा ही लक्ष्य की पूर्ति की गई है।
दो, डिण्डौरी, टीकमगढ़, निवाड़ी, कटनी, अलीराजपुर, शहडोल, श्योपुर, आगर मालवा एवं अशोकनगर जिलों द्वारा न के बराबर अर्थात शून्य से दस प्रतिशत तक वसूली की है, जोकि घोर आपत्तिजनक है।
तीन, झाबुआ, बड़वानी, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, गुना, दतिया, मुरैना, उज्जैन,  शाजापुर, रीवा, सीधी, अनूपपुर एवं होशंगाबाद जिलों द्वारा दस से 20 प्रतिशत तक ही वसूली की है जोकि कार्य के प्रति उदासीनता का परिचायक है।
चार, शेष जिलों इंदौर, बुरहानपुर, भोपाल, रायसेन, छिन्दवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, दमोह, पन्ना, छतरपुर, शिवपुरी, भिण्ड, देवास, नीमच, रतलाम, मंदसौर, सतना, सिंगरौली, उमरिया एवं हरदा द्वारा भी लक्ष्य प्राप्ति के लिये कोई विशेष प्रयास नहीं किये गये हैं।
पांच, सीहोर, बैतूल एवं नरसिंहपुर जिलों द्वारा ही तृतीय तिमाही तक निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास किया गया परन्तु ये भी वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाये हैं।

प्रदेश के सरकारी कालेजों में खुलेंगे जिम

 राज्य सरकार सरकारी कालेजों में विद्यार्थियों के लिये जिम खोलेगी। इसके लिये कालेजों के प्राचार्यों से गूगल फार्म लिंक पर जानकारी मांगी गई है।
उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में बताया है कि विश्व बैंक पोषित ‘‘उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन परियोजना के तहत आईडीपी अंतर्गत चिन्हित महाविद्यालयों द्वारा जिम एवं स्पोर्ट्स उपकरण स्थापित करने हेतु मांग की गई है। इस संदर्भ में महाविद्यालयों की मांग अनुसार उपकरणों के मापदंड निर्धारित करने हेतु राज्य स्तर पर संचालक एलएनआईपी, संयुक्त संचालक खेल कूद विभाग तथा महाविद्यालयों की स्पोर्टस ऑफिसर की एक संयुक्त टीम बनाई गई थी। समिति द्वारा महाविद्यालयों में ओपन जिम (लेग प्रेस, आर्म एण्ड शोल्डर वील, डबल क्रोस वॉकल, इलीप्टीकल एक्सरसाईजर, सिट-अप स्टेशन, एक्सरसाईजिंग बार, चिन-अप बार, आर्म वील, रोइंग मषीन, नी एचआईपी रेज, ट्वीस्टर) तथा रेसलिंग मेट एवं मल्टीपर्पस मेट (कबड्डी, कराटे एवं खो-खो) स्थापित करने की अनुशंसा की गई है, जिस हेतु एक ओपन जिम स्थापित करने के लिए न्यूनतम 10 गुणित 10 मीटर के स्थान की आवश्यकता होगी।

39 विषयों के सहायक प्राध्यापक पदों
पर दिव्यांगजनों को मिलेगा आरक्षण 

राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्वीकृत 39 विषयों के 8 हजार 32 सहायक प्राध्यापक पदों पर दिव्यांगजनों को छह प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इसके लिये सामाजिक न्याय विभाग ने पदों का चिन्हांकन कर लिया है। ये सभी पद द्वितीय श्रेणी के हैं।
कुल स्वीकृत पदों में से 482 पदों पर दिव्यांगजनों को आरक्षण मिलेगा। इनमें 121 पद दृष्टिबाधितों, 120 पद श्रवण बाधित, 121 पद लोकोमीटर डिसेबिलिटी एवं 120 पद बौध्दिक दिव्यांगता वालों के लिये रखे गये हैं। लोकोमीटर डिसेबिलिटी में सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग मुक्त, बौनापन, एसिड अटैक पीडि़त, मस्कुलर डिस्ट्राफी के लोग शामिल हैं जबकि बौध्दिक दिव्यांगता में ऑटिज्म, स्पेसिफिक लर्निंग डिसेबिलिटी और मानसिक बीमारी व बहुविकलांगता शामिल है।
जीव रसायन, रसायन आर्गेनिक, रसायन भौतिक, अपराध शास्त्र, नृत्य, प्राचीन इतिहास, ज्योतिष, लोक प्रशासन, संस्कृत ज्योतिष, संस्कृत प्राच्य, संस्कृत साहित्य, संस्कृत व्याकरण तथा वेद विषयों वाले सहायक प्राध्यापक पदों पर दिव्यांगजनों को कोई आरक्षण नहीं दिया गया है। जबकि उदर्् विषय के 46 पदों में से 3 पदोंपर दिव्यांगजनों को आरक्षण दिया गया है। राजनीति शास्9 के 593 पदों में से 36 पद आरक्षण प्रदान किया गया है। हिन्दी के 676 पदों में से 41 पर तथा अंग्रेजी के 642 पदों में से 39 पर आरक्षण दिया गया है।
अब राज्य लोक सेवा आयोग जब भी उक्त पदों पर भर्ती आयोजित करेगा तो उसे उक्त चिन्हांकित पदों के अनुसार दिव्यांगजनों को आरक्षण देना होगा।

सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों को निपटाने 
में पिछड़ा लोक निर्माण विभाग

भोपाल।राज्य का लोक निर्माण विभाग सीएम हेल्पलाईन में आई शिकायतों को निपटाने में पिछड़ गया है। इसके कारण विभाग को अपने अधीनस्थ अधिकारियों को आड़े हाथ लेना पड़ा है और उन्हें लापरवाह कहते हुये हिदायत देनी पड़ी है कि गंभीरता से लंबित शिकायतों का निराकरण करें अन्यथा उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
विभाग ने कहा है कि निचले स्तर पर शिकायतों के निराकरण में विलम्ब किया जा रहा है जिससे ग्रेडिंग पैरामीटर में विभाग की स्थिति निरन्तर डी ग्रेड में पाई गई है। खास तौर पर जिला स्तर पर लंबित शिकायतों की संख्या अधिक है एवं इनमें भी बहुत सी शिकायतें सौ एवं तीन सौ दिन से अधिक समय से लंबित हैं। निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा न तो शिकायतकत्र्ता से सम्पर्क किया जा रहा है और न ही शिकायतों के निराकरण हेतु कोई प्रभावी कार्रवाई अथवा प्रयास किये जा रहे हैं। निचले स्तर के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और नही निराकरण के प्रति रुचि दिखा रहे हैं जोकि कार्य में लापरवाही का द्योतक है।
ये आ रही हैं शिकायतें :
लोनिवि में अधूरे निर्माण कार्यों, ठेकेदारों के पंजीयन, सडक़ों/पुलियों/पहुंच मार्ग, नवीन निर्माण कार्यों की मांग, निर्माण कार्यों के लंबित भुगतान, पैट्रोल पम्प/डायवर्सन की एनओसी न मिलने, अनुकम्पा/पेंशन से संबंधित शिकायतें सीएम हेल्प लाईन में आई हैं।
यह किया बदलाव :
लोनिवि ने शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिये नया बदलाव किया है। अब एल-1 स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी, एल-2 स्तर पर कार्यपालन यंत्री, एल-3 स्तर पर मुख्य अभियंता तथा एल-4 स्तर पर आने वाली शिकायतों का निराकरण प्रमुख अभियंता स्तर पर किया जायेगा। ऐसी ही व्यवस्था पीआईयू एवं रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन के लिये भी की गई है।

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