डॉ.नवीन जोशी

भोपाल।पिछली कमलनाथ सरकार के समय वर्ष 2019 में विधायकों के लिये तीन सुविधायें खत्म कर दी गई थीं जिन्हें अब वर्तमान शिवराज सरकार ने फिर से बहाल कर दिया है।
दरअसल वर्ष 2013 में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत विधायकों द्वारा अपनी निधि से जिन मदों पर राशि दी जा सकती है, उसकी सूची जारी की गई थी। इस सूची में उल्लेखित तीन सुविधाओं को पिछली कमलनाथ सरकार ने खत्म कर दिया था जिसे अब वर्तमान शिवराज सरकार ने पुन: बहाल कर दिया है। राज्य के योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को जारी पत्र में इन तीनों सुविधाओं के बहाल होने की जानकारी दी गई है तथा अपने जिले के विधायकों को इसकी जानकारी भी देने के लिये कहा गया है।
ये हैं तीन सुविधायें :
एक, पंजीकृत मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं के शिक्षण कार्य हेतु भवन निर्माण हेतु अनुदान दिया जा सकेगा।
दो, शिक्षण संस्थाओं के लिये फर्नीचर/टाट पट्टी क्रय की व्यवस्था, राजीव गांधी बहु माध्यमीय अध्ययन केंद्र भवन, वी सेट क्रय एवं सेट की स्थापना पर भी निधि दी जा सकेगी। (पहले सिर्फ शासकीय संस्थाओं के लिये यह सुविधा थी।)
तीन, सामाजिक संगठनों के लिये धर्मशाला, पंजीकृत सोसाटियों/न्यासों/सामुदायिक भवन निर्माण कार्य पर अधिकतम 10 लाख रुपये की निधि दी जा सकेगी।
इसलिये किया बहाल :
विधायकगण बार-बार सीएम शिवराज से आग्रह कर रहे थे कि उन्हें उक्त तीन सुविधाओं पर भी निधि देने की इजाजत दी जाये। इसीलिये अब इन्हें पुन: बहाल कर दिया गया है।

जल संसाधन विभाग के दो कार्यपालन यंत्री निलम्बित

भोपाल।राज्य शासन ने जल संसाधन विभाग के पेंच डायवर्सन परियोजना बांध संभाग सिंगना, चौरई जिला छिन्दवाड़ा में पदस्थ प्रभारी कार्यपालन यंत्री आशीष महाजन तथा जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा के प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरुणेन्द्र नाथ शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया। दोनों पर विभागीय परियोजनाओं एवं कार्यों के क्रियान्वयन में पदीय दायित्वों एवं शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने का आरोप है। निलम्बनकाल में दोनों का मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता जल संसाधन भोपाल रखा गया है।
वैध खनिज परिवहनकर्ताओं को न रोका जाये

भोपाल।प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन करने वालों पर चल रहे अभियान के बीच खनिज विभाग को नये निर्देश जारी करने पड़े हैं। विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि ऐसे खनिज परिवहनकत्र्ताओं जिनके द्वारा खनिज का वैधानिक रुप से परिवहन किया जा रहा है, उन्हें अनावश्यक रुप से बाधित न किया जाये। इससे खनिज राजस्व प्राप्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। विभाग ने इस निर्देश का कड़ाई से पालन करने के लिये कहा है।

अब दो केंद्रीय कानूनों के तहत भोपाल
एवं इंदौर में मैट्रो रेल का संचालन होगा

प्रदेश के दो महानगरों में निर्माणाधीन मैट्रो रेल परियोजनाओं के लिये नया प्रावधान कर दिया गया है। मप्र सरकार के परामर्श पर केंद्र सरकार ने भूमिगत रेल संकर्म संनिर्माण अधिनियम 1978 तथा मैट्रो रेल प्रचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 इन दोनों महानगरों में प्रभावशील कर दिये हैं। इससे अब इन परियोजनाओं का संचालन इन दोनों केन्द्रीय कानूनों के तहत होगा तथा केंद्र सरकार भी इसमें पर्यवेक्षण सहित अन्य सहायतायें एवं सुविधायें प्रदान करेगी और ये परियोजनायें अध्निियम में दिये निर्धारित मानकों के अनुसार बनेंगी।

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