• कृषि कानून के विरोध में जारी आंदोलन २६ जनवरी की हिंसा के बाद खत्म होता दिखा लेकिन राकेश टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन में नई जान फूंक दी.
  • राकेश टिकैत के आंसुओ के बाद ही आंदोलन स्थल से वापस जा रहे किसान दोबारा बड़ी संख्या में वापस आ गए, सारा फोकस गाजीपुर बॉर्डर पर चला गया.
  • ये आंसू क्यों निकले के जवाब में टिकैत ने कहा- पुलिस लाठी चलाए कोई दिक्कत नहीं लेकिन गुण्डों ने लाठी उठा ली और आंदोलन खत्म करवाने आ गए.
  • टिकैत ने आगे कहा- उस वक्त अधिक भावनात्मक हो गया था, साथी किसानों की चिंता हो रही थी, जिन्हें मारे पीटे जाने का डर था.
  • गौरतलब है कि गाजीपुर बॉर्डर पर भाजपा विधायक बड़ी संख्या में लोगों के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंच गए थे जो पुलिस के आगे-आगे चल रहे थे.
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