पक्षकार ने संविधान के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया
दिनेश सोलंकी

*महू, 12 फरवरी*। नगर के वरिष्ठ अभिभाषक मजीद दरबारी ने अपने पक्षकार पत्रकार दिनेश सोलंकी की ओर से महू के आम नागरिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाते हुए स्टेशन कमाण्डर, एडम कमाण्डेन्ट और छावनी परिषद को नोटिस देकर कहा है कि यदि महू में बंद पड़े आम रास्तों को १५ दिवस में नहीं खोला गया तो हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाने के लिये बाध्य होना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि महू में लॉक डाउन के बाद से ही माल रोड से लगे पांच आम रास्तों को और तेलीखेड़ा पहुँच मार्ग को सेना ने बंद कर दिया है। जबकि कुछ माह पूर्व स्वर्ग मंदिर के दोनों ओर के रास्ते भी बंद किये जा चुके हैं। इसे लेकर काँग्रेस की ओर से पुनित शर्मा और जनता काँग्रेस की ओर से अमित वर्मा ने भी ध्यानाकर्षण कराते हुए जनहित में उक्त सभी मार्ग खोलने की मांग की है और आंदोलन की चेतावनी दी जा चुकी है। इस मामले में समाचार पत्र के विभिन्न अंकों में भी समाचार प्रकाशित किये गए थे। जबकि छावनी परिषद ने यह आश्वस्त किया था कि वें बंद रास्तों को खोलने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन इन सबके बावजूद आम रास्ते आज तक नहीं खोले जा सके हैं।
नोटिस में बताया गया कि ऐसा करना आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना है। जबकि छावनी में कोई भी आम रास्ता बंद नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये छावनी परिषद की सम्पत्ति हैं जिनके रखरखाव एवं व्यवस्था का दायित्व भी परिषद पर है। धारा २५८ (२) के अनुसार छावनी अधिनियम २००६ के अंतर्गत किसी भी सड़क को सुरक्षा कारणों के सिवा ऑफिसर कमाण्डिग इन चीफ या प्रिंसिपल डायरेक्टर की अनुमति के बिना बंद नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा के कारण पर भी आम जनता को सूचित किये बिना तथा आम जनता की आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद ही कोई रास्ता बंद किया जा सकता है। छावनी परिषद को भी पब्लिक नोटिस देने के बाद ही किसी सड़क को अस्थायी रुप से बंद किया जा सकता है।
दरबारी ने बताया कि हमारे पक्षकार के नोटिस के मुताबिक यदि अगले १५ दिवस में बंद रास्ते नहीं खोले गए तो हाई कोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत की जाएगी।
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