इंदौर। कला विषय में स्नातक की पढ़ाई करते हुये विगत कुछ वर्षों से लेखन का कार्य कर रहे अमित चौहान अभ्यंकर ने कवि सम्मेलन के मचों पर हाल ही में पग धरा है। आपकी शुरुआत से ही आध्यात्म, राजनीति शास्र और दर्शनशास्त्र में रूचि रही है। कविता लिखने की प्रेरणा आपको भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री पं. अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताएं और भाषण पढ़कर प्राप्त हुई। आपने तब ही से तुकबन्दी मिलाकर कविताएँ लिखना आरम्भ कर दी। हिंदी साहित्य और व्याकरण का ज्ञान आपको इंदौर के ओजस्वी कवि हिमांशु भावसार ‘हिन्द’ के सानिध्य में प्राप्त हुआ। इंदौर के ही लोकप्रिय गीतकार कवि गौरव चौहान ‘साक्षी’ का भी विशेष मार्गदर्शन आपको समय-समय प्राप्त होता रहा है। कवि सम्मेलन मचों के प्रारंभिक दौर से गुजर रहे अमित ने अल्प समय में ही कई प्रसिद्ध कवि सम्मेलन और काव्यगोष्ठीयों में काव्यपाठ कर गौरव प्राप्त किया है। राष्ट्रीय स्तर की कई पत्रिकाओं में आपकी कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। दो सांझा काव्य संकलन (anthology) में आपकी कविताएँ प्रकाशित हो चूकी है। वीर रस प्रख्यात कवि लव यादव जी और कवयित्री मुस्कान राज जी के साथ इंदौर का प्रथम साहित्यिक ओपन माईक तंरग आयोजित करने का शुभ-अवसर प्राप्त हुआ है। देवगुराड़ियां इंदौर के रहने वाले और पीएमबी गुजराती आर्टस एण्ड लाॅ काॅलेज में अध्यनरत अमित निरंतर काव्य संरचना के गूर सीखते हुये आगे बढ़ रहे है। आपकी प्रगति देख गुरूजन, इष्ट-मित्र और माता-पिता में हर्ष व्याप्त है।

आपकी   काव्य रचना की कुछ पंक्तियाँ है-

प्रेमियों ने प्रेम के तराने जो सुहाने गाइये,
प्रेम अनुराग से वो मिल मिल गाइये।

कामिनी के कजरारे काले काले नयनो के,
काली घनी जुल्फों के गीत गुनगुनाइये।

सप्तरंग नवरस नवल नवीन राग,
हास्य प्रतिहास सब सुनिये सुनाइये।

प्रीत गीत रीत रहे संग में भले ही किन्तु
वीरता का चोला न बसंती भूल जाईये।

– कवि अमित चौहान ‘अभ्यंकर’

प्रस्तुति – जितेन्द्र शिवहरे

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here