प्रदेशवार्ता. मनरेगा आई तो गांव में रोजगार देने के लिए लेकिन समय. समय पर इसमें घपले घोटाले सामने आते रहते हैं. वरिष्ठ अधिकारियों को समझ भी तब आती है जब घोटाले की राशि लाखों रुपए में पहुंच जाती हैं. पहले से अगर क्रास सत्यापन हो तो मनरेगा के घोटाले बंद हो सकते हैं. देवास जिले में घोटाले का नया मामला सामने आया हैं. कन्नौद के गांव बरूट का रोजगार सहायक पुलिस के हाथ लगा है. बरूट की ग्राम पंचायत का रोजगार सहायक कमलेश पिता धन्नालाल जाट फर्जी मस्टर के जरिये भुगतान की राशि आहरित करवा रहा था. आरोपी ने इसके लिए फर्जी 82 जाबकार्ड बनवाए. इन जाब कार्ड के आधार पर आरोपी 27 लाख 27 हजार 929 रुपए हजम कर गया. गबन का भंडाफोड तब हुआ जब सहायक लेखा अधिकारी मनरेगा के राजेश बामने को जांच में भारी गडबड मिली. गडबडी की शिकायत बामने ने कन्नौद पुलिस से कर आरोपी पर प्रकरण दर्ज कराया. आरोपी बडी होशियारी से फर्जी बैंक खाते खोलकर बैठा था. अलग.अलग खातों के अनुसार आरोपी के पास से 149 एटीएम कार्ड भी पुलिस ने बरामद किए साथ ही अलग. अलग नामों की बैंक पासबुक भी पुलिस ने बरामद की है. घर पर ही थंब मशीन, प्रिंटर व अन्य सामान भी मिले जो बताते है कि आरोपी आराम से राशि हडप रहा था. कन्नौद पुलिस ने आरोपी पर शासकीर राशि के गबन का मामला दर्ज किया हैं. टीआई तहजीब काजी के नेतृत्व में कार्यवाही की गई. कार्यवाही में उपनिरीक्षक राहुल रावत, प्रधान आरक्षक अशोक जोसवाल, आरक्षक करणसिंह, मुस्कान शामिल थे.
