प्रदेशवार्ता. मप्र में एक विधायक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया हैं. फैसले के अनुसार विधायक से पेंशन और अन्य लाभों की वसूली की जाएगी. वसूली के साथ ही कानूनी कार्रवाई भी होगी. खुद को पूर्व विधायक भी नहीं लिख पाएंगे. याने कोर्ट ने विधायक का भूतकाल भी जीरो कर दिया. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला गुना विधानसभा सीट से विधायक रहे राजेंद्रसिंह सलूजा को लेकर आया हैं. सलूजा 2008 में भारतीय जनशक्ति पार्टी से चुनाव लडकर विधानसभा पहुंचे थे. गुना सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. सलूजा के जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज हुई थी. इसके बाद अगस्त 2011 में उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था. हाईकोर्ट में केस चला और इस दौरान विधायक ने अपना कार्यकाल भी पूरा कर लिया. इसी दौरान हाईकोर्ट ने एक याचिका में पेंशन और अन्य लाभ नहीं मिलने की बात को खारिज कर दिया था. इसके बाद 2016 में पार्षद वंदना पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाई. याचिका में मांग की गई कि विधायक पेंशन व अन्य लाभ पाने के अधिकारी नहीं हैं. साथ ही इनसे तमाम लाभों व पेंशन की वसूली की जाए. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया. विधायक की पेंशन व अन्य लाभों को निरस्त करने के साथ ही इनकी वसूली का आदेश सुनाया.
