प्रदेशवार्ता. मप्र के जनजातीय विभाग में घोटालें का खुलासा हुआ हैं. विभाग के अफसरों ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अतिथि शिक्षकों के नाम पर आने वाला वेतन उठा लिया. करीब दो करोड साठ लाख रुपए का घोटाला किया गया. स्थानीय प्रशासन पहले तो चुप रहा लेकिन भोपाल से ही गडबडी पकडे जाने के बाद सक्रिय हुआ. पूरा मामला मप्र के उमरिया जिले का हैं.
एफएफआईसी अर्थात फाइनेंशियल इंटेलिजेंस टीम ने वर्ष 2018 से जनजातीय कार्य विभाग के उमरिया जिले के पाली ब्लाक में चल रहे गड़बड़ी का खुलासा किया। कमेटी को 24 खातों में संदेह हुआ और उसके बाद पता चला कि ये सभी 24 खाते जिम्मेदार अफसरों के परिवार के हैं। बता दें पूरा खेल 2018 से लेकर 2023 के बीच खेला गया है। जांच के बाद इसमें गड़बड़ी की राशि और अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
भोपाल के आयुक्त कोष एवं लेखा ने ये घपला पकडा. भोपाल में बैठे अफसरों ने पाली ब्लॉक में 24 ऐसे संदिग्ध खातों को पकड़ा है। उनकी सूची भी भेजी है। पूरा कारनामा पाली ब्लॉक में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक रामबिहारी पाण्डेय, लिपिक अशोक कुमार धनखड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर बालेंद्र द्विवेदी ने किया है। एक सवाल अब भी उठ रहा है कि बीईओ राणा प्रताप सिंह आहरण संवितरण अधिकारी हैं और उनके ही हस्ताक्षर से राशि आहरण होती थी, फिर भी उन्हें जांच से दूर रखा गया हैं. अभी और अधिकारी इस कारनामें में शामिल हो सकते हैं.
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