पुलिस प्रशासन

फर्जी मेडिकल बिल लगाकर तीन पुलिस वालों ने अपने खातों में डलवाए 76 लाख रुपए… संचालक ट्रेजरी का पत्र पुलिस मुख्यालय पहुंचा तब खुली फर्जीवाडे की कहानी


प्रदेशवार्ता. फर्जी मेडिकल बिलों का सहारा लेकर राजधानी भोपाल में तीन पुलिस वालों ने 76 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए. तीनों पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा में काम करते थे. इनमें से एक सूबेदार, एक सब इंस्पेक्टर और एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर है. इन्होंने पिछले तीन सालों में खुलकर हाथ खोले और खुद को और परिवार के सदस्यों को बीमार बताकर पैसा बनाया. इनके खातों में खूब पैसा आया. घपले को अंजाम देने के लिए इन्होंने खुद को और अपने परिवार के सदस्यों को अलग-अलग बीमारियां बताकर मेडिकल बिल जमा किए थे। यह बिल असामान्य रूप से ज्यादा थे, जिससे शक पैदा हुआ। जांच में पता चला कि इन्होंने ‘प्रो-लॉन्ग सर्टिफिकेट’ का भी गलत इस्तेमाल किया। यह सर्टिफिकेट गंभीर बीमारियों के लिए सिविल सर्जन द्वारा जारी किया जाता है। लेकिन जांच दल ने जब सिविल सर्जन से पुष्टि की, तो पता चला कि उन्होंने इन तीनों को केवल दो ही सर्टिफिकेट जारी किए थे। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि बाकी सभी सर्टिफिकेट फर्जी हैं।
इनके घपले की पोल संचालक ट्रेजरी की ओर से भेजे पत्र के बाद खुली. पत्र में उल्लेख था कि इन तीनों के खाते में असमान्य रूप से उच्च भुगतान हुआ है. असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर हर्ष वानखेड़े के खाते में लगभग 35 लाख रुपए, सब इंस्पेक्टर हरिहर सोनी के खाते में लगभग 24 लाख रुपए और सूबेदार नीरज कुमार के खाते में लगभग 17 लाख रुपए का भुगतान हुआ. यह कुल मिलाकर लगभग 76 लाख रुपए होता है। पुलिस इस मामले में पता कर रही है की क्या और भी लोग इस घपले से जुडे हैं. सिविल सर्जन से भी पुलिस पूछताछ कर रही हैं. एडीजी अनिल कुमार ने बताया कि संचालक ट्रेजरी से पत्र मिलने के बाद गोपनीय जांच शुरू की गई थी। जांच शुरू होने से पहले ही तीनों आरोपियों को लेखा शाखा से हटा दिया गया था। जांच में आरोप सही पाए जाने पर 8 जनवरी को तीनों को निलंबित कर दिया गया। तीनों के खिलाफ जहांगीराबाद थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 318, 319, 336, 338 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में 14 साल तक की सजा का प्रावधान है।

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