प्रदेशवार्ता. शेयर बाजार में जब पैसा डूबने लगता है तो कुछ देर में ही हजार करोड भी साफ हो जाते हैं. ये क्षेत्र जोखिमभरा हैं. शेयर मार्केट में डूबकर कई बर्बाद हुए. इन दिनों सरकारी कर्मचारी भी चिंता में हैं. वजह बन रही है उनकी एनपीएस याने नेशनल पेंशन स्कीम. ये पूरा शब्द आकर्षक हैं. लेकिन हैं बेहद जोखिम से भरा. दरअसल सरकार ने 2005 से पुरानी पेंशन स्कीम को खत्म करके इसे लागू किया था. इस योजना में कर्मचारी के वेतन से 10 प्रतिशत व सरकार अपनी तरफ से 14 प्रतिशत मिलाकर इसका फंड बनाया, ये राशि बाजार में निवेश की जाती हैं. बाजार वैसे भी जोखिम के अधीन होता हैं. इन दिनों एनपीएस में रिटर्न घटता जा रहा हैं. ये गिरावट इतनी अधिक है कि पिछले चार महीने में ही रिटर्न 30 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत पर आ गया. मप्र में 4 लाख 60 हजार कर्मचारी हैं जिनकी पेंशन बाजार के अधीन हैं. याने एनपीएस से जुडी हैं. शेयर बाजार में रिटर्न घटने लगा है तो कर्मचारियों को डर है कि कही उनकी पेंशन इससे प्रभावित न हो जाए. 2018 के विधानसभा चुनाव के समय कर्मचारी लामबंद हुए थे व पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने की जबर्दस्त तरीके से मांग रखी थी. अब फिर से कर्मचारी मुखर हो रहे हैं. संभाग स्तर पर बैठके आयोजित हो रही है.
