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थे तो सीईओ लेकिन जलवे ऐसे थे कि न तो विभाग के मंत्री की आपत्ति चलने दी न ही प्रमुख सचिव की सलाह मानी..


प्रदेशवार्ता. आजिविका मिशन मप्र में बडी वित्तीय अनियमितता उजागर हुई हैं. ये गडबडी बताती है कि कैसे अगर ऊपर से वरदहस्त प्राप्त हो तो नीचे का अफसर विभाग के मंत्री की भी नहीं सुनता. लेकिन एक न एक दिन काला चिट्ठा बहार आ ही जाता हैं. पूर्व सीएम शिवराजसिंह चौहान के अंतिम कार्यकाल में इकबालसिंह मप्र के प्रमुख सचिव थे. इन्हीं इकबाल सिंह के करीबी अफसर आजीविका मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने प्रकरण दर्ज किया है. पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल पर सरकार की बडी मेहरबानी रही. बेलवाल रिटायर हो गए लेकिन उसके बाद भी उन्हें सीईओ का पद मिलता रहा. समय. समय पर उनके ऊपर नियुक्तियों में अनियमितता, खरीदी में गडबडी के आरोप लगे. शिकायतों के बाद भी बेलवाल को सीईओ की कुर्सी पर बैठाया जाता रहा. बेलवाल पर आरोप है कि अधिकार सीमा से बाहर जाकर राज्य आजिविका मिशन में नियुक्तियां कीं. बेलवाल ने सलाहकारों के पद पर अवैधानिक नियुक्तियां कीं. स्कूल गणवेश सिलाई, कम्युनिटी बेस्ड माइको बीमा योजना एवं विकासखंड स्तर पर मशीनों को खरीदने में भी उन पर सवाल उठे. बेलवाल प्रतिनियुक्ति पर वर्ष 2015 से 2023 तक रहे. बेलवाल ने राज्य परियोजना प्रबंधक के पदों पर सलाहकारों की नियुक्तियां की. खास बात यह की इन नियुक्तियों पर पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के प्रमुख सचिव के निर्देशों को भी दरकिनार कर दिया गया. तत्कालिन विभागीय मंत्री की आपत्तियों को भी नजरअंदाज किया और नियुक्तियां कर दी. खास बात यह भी है कि नियुक्तियां मानव संसाधन मार्गदर्शिका के नियमों को आधार बनाकर की गई. लेकिन जिस समय नियुक्तियां हुई उस समय ये मानव संसाधन मार्गदर्शिका वजूद में ही नहीं थी. नियुक्तियों के बाद मेहरबानी इतनी की मानदेयों में सीधे 40 प्रतिशत की बढोत्तरी की गई. पद का दुरूपयोग करते हुए बिना आर्हता के सुषमा रानी शुक्ला व उनके परिवार के सदस्यों देवेंद्र मिश्रा, अंजु शुक्ला, मुकेश गौतम, ओमकार शुक्ला, आकांक्षा पांडे की नियुक्ति मिशन के विभिन्न पदों पर की गई. भोपाल की अदालत में राजेश कुमार मिश्रा ने यह मामला लगाया था. इसके आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एवं सीजेएम भोपाल ने जांच एजेंसी को कार्यवाही कर जांच के लिए आदेशित किया था.

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