प्रदेशवार्ता. देश में एथेनॉल मिक्स पेट्रोल को पर्यावरण-अनुकूल नीति के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश में एथेनॉल प्रोडक्शन के नाम पर सरकारी चावल के घोटाले का मामला सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 5 लाख मीट्रिक टन (50 लाख क्विंटल) सरकारी चावल में से ज्यादातर चावल का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हुआ ही नहीं। यह चावल दोबारा सरकारी गोदाम पहुंच गया। इसकी कीमत करीब 1160 करोड़ रुपए है।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि यह सामान्य नहीं, बल्कि फोर्टिफाइड चावल था। इसे कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को एनीमिया व कुपोषण से बचाने के लिए विटामिन और मिनरल्स मिलाकर तैयार किया जाता है। इस घोटाले में एथेनॉल प्लांट संचालक, राइस मिलर्स और सरकारी तंत्र की मिलीभगत की आशंका है।
इस घोटाले को समझने के लिए पहले सरकारी चावल की खरीद और उसकी लागत का गणित समझना जरूरी है। सरकार का तर्क है कि गोदामों में अतिरिक्त अनाज लंबे समय तक रखने से उसके खराब होने का जोखिम रहता है। नई फसल के भंडारण के लिए जगह भी चाहिए।
सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल उत्पादन से ऊर्जा जरूरतें पूरी होती हैं और विदेशी मुद्रा की बचत होती है। इसी नीति के तहत, जिस चावल की खरीद, भंडारण और प्रोसेसिंग पर सरकार का खर्च लगभग ₹3,900 से ₹4,000 प्रति क्विंटल आता है, उसे एथेनॉल प्लांट्स को ₹2,320 प्रति क्विंटल की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
मामले का खुलासा 2 जून को नवेगांव वेयरहाउस (बालाघाट) से एवीजे एथेनॉल प्लांट (छिंदवाड़ा के बोरगांव) भेजे गए तीन ट्रक चावल की जांच के दौरान हुआ। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इनका उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए होना था।
हालांकि, 3 जून को इनमें से एक ट्रक बालाघाट की संचेती राइस मिल में मिला, जबकि बाकी दो ट्रक भी छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट तक नहीं पहुंचे। घटना सामने आने के बाद पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच शुरू की।
अब तक की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं
• राइस मिलर्स, एथेनॉल प्लांट संचालकों, ट्रांसपोर्टर्स सहित 40 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है।
• अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
• जांच के दौरान अब तक 12 ट्रक जब्त किए जा चुके हैं।
• जांच का दायरा छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी से बढ़कर प्रदेश के अन्य एथेनॉल प्लांट्स और कस्टम मिलिंग करने वाली राइस मिलों तक पहुंच गया है।
इस पूरे सिंडिकेट में इन सबकी भूमिका संदेह के घेरे में है – एथेनॉल प्लांट संचालक, राइस मिलर्स, FCI (भारतीय खाद्य निगम) अधिकारी, जिला प्रशासन
