Tuesday, September 15th, 2026 | 10:45 AM

बच्चा अगर मोबाइल.. टीवी ज्यादा देख रहा तो हो जाए सावधान..इनके कारण रूक रहा बच्चों का दिमागी विकास…बच्चों में तेजी से बढ रहा वर्चुअल आटिज्म…बच्चे फिर न तो घुल मिल पाते और न ही बोल पाते..

by Amjad Shaikh


प्रदेशवार्ता. एकल परिवार की बढती संख्या बच्चों के सामाजिकरण में बाधा बनकर सामने आ रही हैं. छोटे बच्चों को मां. बाप बिजी रखने के लिए हाथ में मोबाइल दे देते हैं या फिर टीवी, कम्प्यूटर में उलझा देते हैं. धीरे. धीरे कर बच्चा इन गजेट्स का आदि बन जाता हैं. वो इसके बाद न तो किसी से बात करना चाहता हैंं और न ही किसी से उसे मेलजोल पसंद होता हैं. शुरू में ये सब बाते बडी सामान्य लगती है और मां. बाप सोचते है कि चलो अच्छा हैं बचा मोबाइल, टीवी में व्यस्त है ओर परेशान नहीं कर रहा. लेकिन पैरेट्स को जब तक पता चलता है बच्चा वर्चुअल आटिज्म का शिकार हो जाता हैं. परेशान मां बाप फिर बच्चे के इलाज के लिए डाक्टर ढूंढतें हैं. बच्चों का दिमागी विकास दो से पांच साल की आयु में होता हैं. बच्चे नई. नई चीजें सीखता है. इसमें दूसरें की बातों को समझना, अपनी प्रतिक्रिया देना, दूसरों से घुलना मिलना भी शामिल हैं. अगर इस उम्र के बच्चे मोबाइल में व्यस्त रहे या रखे गए तो उनका मानसिक और शारीरिक विकास सीधे सीधे प्रभावित होता हैं. इस लक्ष्ण को वर्चुअल आटिज्म कहा जाता हैं.. ऐसे बच्चे अपनी आयु के बच्चों के साथ नहीं खेलते, खुद में खोए रहते हैं, देरी से बोलना सीखते है… बार. बार एक ही शब्द दोहराते हैं. आटिज्म के लक्षण… बाल रोग विशेषज्ञ डा. रोहित बताते है कि आटिज्म से पीढित बच्चा अपना नाम सुनकर प्रतिक्रिया नहीं देता, आंखों में आंखे डालकर बात नहीं करता, अकेले खेलता है, अक्सर गुस्सा करना और खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता हैं. ऐसे बच्चे बार. बार एक ही काम करते हैं. अपनी चीजें दूसरों को शेयर नहीं करते ऐसे कई लक्ष्ण आटिज्म पीढित बच्चों में पाये जाते हैं.

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