Wednesday, August 12th, 2026 | 1:04 AM

गांव का नाम बदल दिया.. उलझे ऐसे की न तो राशनकार्ड काम कर रहा, न ही हो रहा किसानों का पंजीयन.. अब विधायक ने की पुराने नाम की अनुशंसा

by Amjad Shaikh

प्रदेशवार्ता. मप्र में गांवों के नाम बदले जा रहे हैं. नाम बदलने से सियासी लाभ जरूर मिल जाए लेकिन ये कवायद ग्रामीणों के लिए भारी सिरदर्द साबित हो रही हैं. पिछले दिनों देवास जिले में भी एक साथ 54 गांवों के नाम बदलने का फरमान सीएम मोहन यादव सुनाकर गए थे. नाम बदलने में कुछ नहीं..बदल दो, लेकिन जिस गांव के नाम बदले जाएंगे उन ग्रामीणों की फजीहत कौन दूर करेगा…? लोगों को छोटे मोटे काम करवाने में ही पसीना आ जाता है, चप्पल घिस जाती हैं. ऐसे में बडा सवाल गांवों से यही निकलकर आ रहा है कि आनलाइन और आफलाइन की फजीहत में फंसे ग्रामीणों की कौन सुनेगा…? गांव के नाम बदलने का भारी साइड इफेक्ट अगर देखना है तो बैतुल जिले के मुलताई में एक गांव को देख लो. मुलताई में एक गांव था चन्दोरा कला 2 गांव के नाम से, फिर इस गांव का नाम बदलकर कर दिया गया सिरसावाडी. अब गांव का नाम बदलने के बाद से ही ग्रामीण परेशान है. ग्रामीणों के राशनकार्ड, वोटरकार्ड और आधारकार्ड में गांव का पुराना नाम चंदोरा कला 2 लिखा हैं. जबकि गांव आनलाइन में बदलकर सिरसावडी हो गया. ऐसे में इस गांव के 89 परिवारों के 450 दस्तावेज पोर्टल पर फेल हो गए. अभी किसानों का गेहूं को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन चल रहा हैं. लेकिन दस्तावेजों में गांव का पुराना नाम होने से आनलाइन पंजीयन नही हो रहा. गरीब लोगों का राशन भी बंद हो गया क्योंकि आनलाइन और आफलाइन दस्तावेज अलग. अलग जा रहे. यही नहीं स्कूली बच्चे भी अपनी छात्रवृत्ति रुकने से परेशान है. परेशान ग्रामीण अब कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से मिले और मांग रखी की उनके गांव का पुराना नाम फिर से बहाल किया जाए. इधर विधायक ने भी ग्रामीणों की परेशानी को देखकर पुराना नाम रखने की अनुशंसा कर दी हैं.

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